जिन नौ जजों का शपथ ग्रहण हुआ है उनके बारे में जानते हैं:-
1.जस्टिस हिमा कोहली:- तेलंगाना हाईकोर्ट की जज थी और ये इस हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस बनने वाली पहली महिला जज भी थीं। ये दिल्ली हाईकोर्ट में भी जज रह चुकी हैं। जस्टिस कोहली को भारत में लीगल एजुकेशन और लीगल मदद से जुड़े अपने फैसलों के लिए जाना जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट के अपने कार्यकाल के वक्त उन्होंने दृष्टि बाधित लोगों को सरकारी शिक्षण संस्थानों में सुविधाएं दिए जाने का फैसला सुनाया था। इसके अलावा नाबालिग आरोपियों की पहचान की सुरक्षा को लेकर भी फैसला दिया था।
2.जस्टिस बेला त्रिवेदी:- गुजरात हाईकोर्ट में 9 फरवरी 2016 से जज थीं। 2011 में ये गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट में एडिशनल जज भी रह चुकी हैं, इनका पूरा नाम बेला मनधूरिया त्रिवेदी है।
3.जस्टिस बीवी नागरत्ना:- जस्टिस नागरत्ना 2008 में कर्नाटक हाईकोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त की गई थीं, फिर 2010 में इन्हें परमानेंट जज नियुक्त कर दिया गया। 2012 में फेक न्यूज के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए जस्टिस नागरत्ना और अन्य जजों ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि वे मीडिया ब्रॉडकास्टिंग को रेगुलेट करने की संभावनाओं की जांच करने और सरकार को मीडिया पर सरकारी नियंत्रण के खतरों से भी आगाह किया था। इनके अनुभव को देखते हुए अंदेशा है कि ये 2027 में देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बन सकती हैं |
4.जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका:- बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल और पर्मानेंट जज रह चुके हैं। 2019 में कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अपॉइंट किए गए थे। जस्टिस ओका सिविल, कॉन्स्टिट्यूशनल और सर्विस मैटर के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस रहते हुए इन्होनें लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा और राज्यों की ज्यादतियों को लेकर फैसले दिए हैं और राज्यों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है।
5.जस्टिस विक्रम नाथ:- ये गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं और इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं। इनका नाम आंध्र प्रदेश के हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के लिए रिकमेंड किया गया था, लेकिन केंद्र ने इस सिफारिश को नामंजूर कर दिया था। 2020 में कोरोना महामारी के दौरान वो देश के पहले चीफ जस्टिस थे, जिन्होंने हाईकोर्ट में वर्चुअल कार्यवाही शुरू की थी।
6.जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी:- सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं और इससे पहले वो आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के भी चीफ जस्टिस रह चुके हैं। ये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी जज रह चुके हैं, इनका जन्म भी मध्य प्रदेश के जौरा में ही हुआ है। हाईकोर्ट की बेंच के लिए प्रमोट होने से पहले वो ग्वालियर में ही वकील थे। इन्होंने मध्य प्रदेश की मेडिकल फैसिलिटीज में खामियों पर पीएचडी भी की है।
7.जस्टिस सीटी रवि:- केरल हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं और इनके पिता मजिस्ट्रियल कोर्ट में बेंच क्लर्क थे। इन्होंने केसों के स्पीड ट्रायल को लेकर बड़ा कमेंट करते हुए कहा था कि कानून की उम्र लंबी होती है, पर जिंदगी छोटी होती है। ये कमेंट उन्होंने 2013 में एक करप्शन केस के मामले में दिया था और दो केसों को अलग किया था ताकि उनके तेजी से ट्रायल में रुकावट न आए।
8.जस्टिस पीएस नरसिम्हा:- बार से सुप्रीम कोर्ट में अपॉइंट होने वाले ये पहले जज हैं और देश के नौंवें जज बने हैं जिसे बार से सीधे अपॉइंट किया गया है |अंदेशा है कि 2028 में ये देश के चीफ जस्टिस भी बन सकते हैं। ये 2014 से 2018 तक एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। इटली नौसेना के केस के मामले में भी ये जजों से जुड़े रहे थे। इन्हें BCCI के प्रशासनिक कार्यों से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए मध्यस्थ भी नियुक्त किया गया था।
9.जस्टिस एमएम सुंदरेश:- केरल हाईकोर्ट के जज हैं। इन्होंने 1985 में वकालत शुरू की थी जिसमे इन्होंने चेन्नई से बीए किया और मद्रास लॉ कॉलेज से लॉ की डिग्री ली।

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