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बॉलीवुड एक्टर राहुल रॉय ने कंटेंट क्रिएटर के साथ Troll होने पर दिया जवाब

फिल्म ‘आशिकी’ फेम राहुल रॉय ने हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर के साथ वायरल हुए वीडियो पर रिएक्ट करते हुए एक इमोशनल पोस्ट लिखी। एक्टर ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, 'मैं अपना काम ईमानदारी और विनम्रता के साथ करता हूं। मुझे कुछ लीगल मामलों के लिए पेमेंट करना है और ये आज के नहीं हैं, ये उस समय के हैं जब ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, उससे पहले के। अगर आप मेरी सादगी का मजाक उड़ाते हैं या मेरे संघर्षों पर हंसते हैं, तो यह मेरे बारे में कम और आपके बारे में ज्यादा बताता है।' एक्टर राहुल रॉय ने आगे यह भी लिखा, 'अगर आप सच में इतने चिंतित हैं, तो मेरी मदद करें कि मुझे कोई सच्चा और अच्छा काम मिल सके, ताकि मैं इन मामलों का पेमेंट कर सकूं। कम से कम मैं मेहनत करके कमा रहा हूं, दूसरों का मजाक उड़ाकर नहीं और ब्रेन स्ट्रोक के बाद, मेरे लिए एक्टिव रहना जरूरी है। मैं जितने समय तक जीवित हूं, काम करना चाहता हूं। यह मेरे दिमाग को एक्टिव रखता है और मुझे उद्देश्य और जिम्मेदारी का एहसास कराता है कि मैं आज भी काम कर रहा हूं। हां, कभी-कभी थोड़ा दर्द हो सकता है, लेकिन आप मुझे तोड़ नहीं सकते।' हाल ही म...
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ईरान जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत $126 प्रति बैरल पहुंची, अगला पड़ाव 140 डॉलर सकता है

मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के पार कर गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 126.31 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फिलहाल यह 125 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेंड कर रहा है। BBC के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आज ईरान के खिलाफ हमले से जुड़ी ब्रीफिंग दी जाएगी। सेंटकॉम ने ईरान के खिलाफ ‘छोटे लेकिन बहुत ताकतवर हमलों’ की प्लानिंग तैयार की है। इसका मकसद सीधे युद्ध को लंबा खींचना नहीं, बल्कि ईरान पर दबाव बनाना है ताकि वह बातचीत में झुक जाए। इसी खबर के बाहर आने के बाद तेल की कीमतें बढ़ी हैं। वही तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि अगला पड़ाव 140 डॉलर होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प को उनके लोग बेकार सलाह दे रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का भी मजाक उड़ाया और कहा कि उनकी सलाह की वजह से तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। ईरानी दूतावास ने बताया भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने बताया कि बुधवार को भारत क...

पीलीभीत में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र के लिए 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर

भारत में बासमती चावल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए   कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), कृषि विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच 70 वर्ष के पट्टे समझौते पर हस्ताक्षर के माध्यम से पीलीभीत के टांडा बिजैसी में बासमती और जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म की स्थापना के लिए भूमि हस्तांतरण को औपचारिक रूप दिया गया है। प्रस्तावित बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र-सह-प्रदर्शन फार्म लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में सभागार, बासमती एवं जैविक खेती पर संग्रहालय और गैलरी, सम्मेलन कक्ष, प्रयोगशाला और जैविक खेती के लिए आवश्यक सामग्री के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होगी। आशा है कि यह सुविधा बासमती एवं जैविक किसानों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायक होगी और कृषि विशेषज्ञों एवं छात्रों के लिए एक संसाधन केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी। एक बार स्थापित हो जाने के पश्‍चात   यह केंद्र देश का पहला बासमती जैविक प्रशिक्षण और प्रदर्शन फार्म होगा, जिसमें पारंपरिक और जैविक दोनों प्रकार की बासमती की ...

प्रधानमंत्री मोदी 28-29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की यात्रा करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 28-29 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की यात्रा पर रहेंगे। 28 अप्रैल को शाम करीब 5 बजे, प्रधानमंत्री वाराणसी में आयोजित महिला सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां वे लगभग 6,350 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे। 29 अप्रैल को सुबह लगभग 8:30 बजे प्रधानमंत्री वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री हरदोई के लिए रवाना होंगे और लगभग 11:30 बजे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे। वाराणसी में प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री महिमा सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसमें पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। प्रधानमंत्री 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 48 पूर्ण परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं में वाराणसी-आजमगढ़ सड़क का विस्‍तारीकरण करना, कज्जाकपुरा और कादीपुर में महत्वपूर्ण रेल ओवरब्रिज का उद्घाटन और भगवानपुर में 55 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उद्घाटन शामि...

रक्षा मंत्री किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह 28 अप्रैल, 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। बैठक के दौरान, संगठन के सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्र की रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-विरोधी उपायों और एससीओ सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति के कारण उत्पन्न भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस वर्ष की एससीओ बैठक हो रही है। यह संगठन, जो   क्षेत्र के सबसे   प्रमुख   राजनीतिक और आर्थिक   मंचों में से एक   है, मौजूदा संघर्ष के प्रभाव को कम करने के   लिए संभावित   उपायों पर   विमर्श   कर सकता है। इस बैठक में रक्षा मंत्री वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के   वर्तमान   परिदृश्य में भारत की   वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता पर   चर्चा   करेंगे।   साथ   ही, आतंकवाद   और   चर...

प्रधानमंत्री 27-28 अप्रैल को Sikkim का दौरा करेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 27-28 अप्रैल 2026 को सिक्किम का दौरा करेंगे। वे 27 अप्रैल को दोपहर लगभग 3 बजे गंगटोक पहुंचेंगे। 28 अप्रैल को सुबह लगभग 9:30 बजे प्रधानमंत्री गंगटोक स्थित ऑर्किडेरियम का दौरा करेंगे। राज्य की पारिस्थितिक और पुष्प विरासत को प्रदर्शित करने के लिए स्वर्णजयंती मैत्री मंजरी पार्क को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त विश्व स्तरीय ऑर्किड अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। इसके बाद, सुबह लगभग 10 बजे, प्रधानमंत्री पालजोर स्टेडियम में सिक्किम के राज्य स्थापना के 50वें वर्ष के समारोह के समापन समारोह में भाग लेंगे, जहां वे राज्य भर में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनेक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शुभारंभ और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे। ये परियोजनाएं बुनियादी ढांचे, संपर्क, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बिजली, शहरी विकास, पर्यावरण, पर्यटन और कृषि सहित कई क्षेत्रों को कवर करती हैं, और इनका उद्देश्य सिक्किम में समग्र और समावेशी विकास को गति देना है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, प्रधानमंत्री नामची जिले के यांगंग में 100 बिस्तरों वाले ...

तमिलनाडु और मेघालय में जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को सुदृढ़ करने के लिए पांच वर्षीय परियोजना का शुभारंभ

ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को हरित रूप देने और अभिनव वित्तपोषण के माध्यम से स्थानीय समुदायों और संस्थानों को सशक्त बनाकर जमीनी स्तर पर जैव विविधता शासन को मजबूत करने के उद्देश्य से, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने ‘जैव विविधता संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना’ नामक एक ऐतिहासिक पांच वर्षीय परियोजना शुरू की है। यह परियोजना भारत सरकार, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (जीईएफ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक संयुक्त पहल है, जिसके लिए 2025-2030 की अवधि के लिए 4.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया गया है। यह परियोजना दो पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण भू-भागों पर आधारित है। तमिलनाडु में, पश्चिमी और पूर्वी घाटों के संगम पर स्थित सत्यमंगलम भू-भाग, जिसमें मुदुमलाई बाघ अभ्यारण्य और सत्यमंगलम बाघ अभ्यारण्य शामिल हैं, वन-सीमावर्ती समुदायों को एकजुट करता है जो वन्यजीव गलियारों के दीर्घकालिक संरक्षक हैं। उनके गहन पारिस्थितिक ज्ञान को ग्राम विकास परियोजनाओं ...

लघु पनबिजली विकास योजना

जल के प्राकृतिक प्रवाह से उत्पन्न होने वाली पनबिजली ,  दुनिया के सबसे भरोसेमंद और विकसित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में से एक है। भारत के तेजी से बदलते ऊर्जा परिदृश्य के बीच ,  यह ग्रिड की स्थिरता ,  ऊर्जा सुरक्षा और प्रणाली की मज़बूती सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। सौर और पवन जैसे रुक-रुक कर मिलने वाले स्रोतों के विपरीत ,  पनबिजली से लगातार ,  चौबीसों घंटे बिजली मिलती है। जैसे-जैसे देश मिलीजुली स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बदलाव ला रहा है ,  जल विद्युत अपरिहार्य बन गई है। इस रणनीतिक महत्व को देखते हुए ,  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने  ' लघु पनबिजली विकास योजना '  को मंज़ूरी दे दी है। यह योजना अलग-अलग राज्यों में छोटी पनबिजली परियोजनायें ( 1-25  मेगावॉट क्षमता वाले) लगाने में मदद करेगी। इस योजना से खास तौर पर उन पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों को फ़ायदा होगा ,  जहाँ इन परियोजनाओं की बहुत ज़्यादा संभावनाएँ हैं। यह मंज़ूरी वित्त वर्ष  2026–27  से वित्त वर्ष  2030–31  तक की अवधि के लिए है ,  जिसका कुल परिव्यय  2...

भिखारियों/आश्रय गृहों की देखभाल, पुनर्वास और प्रबंधन संबंधी आदर्श दिशा - निर्देशों का अनावरण किया गया

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 24 से 26 अप्रैल, 2026 तक चंडीगढ़ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित चिंतन शिविर के दौरान भिखारियों/आश्रय गृहों की देखभाल, पुनर्वास और प्रबंधन पर आदर्श दिशानिर्देशों का अनावरण किया। इन दिशानिर्देशों में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता, अवसंरचना और क्षमता, पोषण और खाद्य सुरक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास, कानूनी सहायता और जागरूकता, बाल और लैंगिक संवेदनशीलता, और जवाबदेही एवं निगरानी जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक व्यापक ढांचा प्रदान किया गया है। ये दिशानिर्देश विभिन्न केंद्रीय और राज्य सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय पर भी जोर देते हैं ताकि उपरोक्त निर्देशों का सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समान रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे देश भर में भिखारियों/आश्रय गृहों में मानवीय और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए इन दिशानिर्देशों को अक्षरशः लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) 2.0 App का शुभारंभ किया गया

सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 15 अगस्त 2020 को 272 चिन्हित सबसे संवेदनशील जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) शुरू किया था और अब इसे 15 अगस्त 2023 से देश के सभी जिलों में शुरू किया गया है।  नशा   मुक्त   भारत अभियान का उद्देश्य जनसमुदाय तक पहुंचना और मादक पदार्थों के सेवन के बारे में जागरूकता फैलाना है। अब तक, जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से, देश भर में शैक्षणिक संस्थानों सहित विभिन्न स्तरों पर आयोजित 8.3 लाख से अधिक गतिविधियों के माध्यम से 26 करोड़ से अधिक लोगों को मादक पदार्थों के सेवन के प्रति जागरूक किया गया है, जिनमें 9.5 करोड़ से अधिक युवा, 6.47 करोड़ से अधिक महिलाएं और 28,000 से अधिक नशा मुक्ति मित्र (पूर्व में मास्टर स्वयंसेवक के रूप में जाने जाते थे) शामिल हैं। दवाओं की मांग में कमी के लिए राष्‍ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के निगरानी एवं कार्यान्वयन ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के माननीय राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया और माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और  अधिकारित...

चंडीगढ़ में आयोजित चिंतन शिविर में स्माइल-बेगरी सर्वे Mobile Application का शुभारंभ

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 24 से 26 अप्रैल 2026 तक चंडीगढ़ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित चिंतन शिविर के दौरान स्माइल-बेगरी सर्वे मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ किया। यह मोबाइल एप्लिकेशन   स्माइल-भिक्षावृत्ति उप-योजना (भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों का व्यापक पुनर्वास) के अंतर्गत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय डेटा संग्रह और बेहतर निगरानी के माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को मजबूत करना है। यह एप्लिकेशन कार्यान्वयन एजेंसियों और जिला अधिकारियों को सर्वेक्षण डेटा को डिजिटल रूप से एकत्रित करने में सक्षम बनाएगा, जिससे सटीकता, पारदर्शिता और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित होगी। मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ देर से और अनियमित डेटा रिपोर्टिंग जैसी चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, साथ ही यह शहरों में वास्तविक समय की निगरानी, ​​डेटा विश्लेषण और प्रदर्शन ट्रैकिंग के लिए मंत्रालय की क्षमता को भी बढ़ाती है। इस अवसर पर बोलते हुए, यह बताया गया कि यह पहल सरकार के "भिक्षावृत्ति मुक्त भारत" के लक्ष्य के अनुरूप है। ...

भारत की पहली Digital गणना, Digital भारत की नई पहचान

भारत की जनगणना विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास के रूप में विकसित हुई है। पहली जनसंख्या गणना 1865-1872 के दौरान आयोजित की गई थी, जिसके बाद 1881 में पहली बार देशव्यापी समकालिक (एक साथ) जनगणना हुई। तब से भारतीय जनगणना हर दस साल में आयोजित की जाती रही है। हालाँकि, कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना समय पर नहीं की जा सकी। इसलिए, जनगणना 2027 इस क्रम की अगली गणना होगी, जो कुल मिलाकर भारत की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना है।   जनगणना  2027  की संस्थागत और विधिक संरचना जनगणना  2027  एक मजबूत संस्थागत और प्रशासनिक ढांचे पर आधारित है ,  जो डेटा संग्रह में निरंतरता ,  विश्वसनीयता और राष्ट्रव्यापी एकरूपता सुनिश्चित करता है। स्वतंत्रता के बाद ,  जनगणना का संचालन  जनगणना अधिनियम , 1948   और  जनगणना नियम , 1990   के तहत किया जाता है ,  जो इसे एक मजबूत कानूनी और संस्थागत आधार प्रदान करते हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत जनगणना एक संघ सूची का विषय है (क्रम संख्या  69  पर सू...