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आपातकालीन देखभाल को सशक्त बनाना: सड़क एम्बुलेंस के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच ) ने देश भर में सड़क एम्बुलेंस की सुरक्षा , कामकाज और चिकित्सीय सुविधाओं को बेहतर बनाने हेतु ‘ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस )- 125’ में बदलाव का प्रस्ताव दिया है।  सड़क एम्बुलेंस आपातकालीन देखभाल में महत्वपूर्ण जीवनरक्षक लिंक हैं ; ये मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उन्नत जीवनरक्षक सहायता (एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट) देने में मदद करती हैं। भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है , जिनमें से कई मौतों को समय पर चिकित्सीय सहायता देकर रोका जा सकता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि अगर दुर्घटना के शिकार लोगों को पहले घंटे के अंदर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए , तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है। मोटर वाहनों के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों को जरूरी चिकित्सीय उपचार की सुविधा प्रदान करने हेतु “प्रधानमंत्री - सड़क दुर्घटना पीड़ितों की अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार (पीएम - राहत ) योजना” जैसी योजनाएं भले ही शुरू ...
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भारी वर्षा के बाद दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर सड़क की सतह धंसने की घटना के संबंध में स्पष्टीकरण

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई, 2026 को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के किलोमीटर 55+480 पर सड़क की सतह धंसने की घटना पिछली रात हुई भारी वर्षा के बाद स्थानीय स्तर पर जल भराव तथा उस स्थान पर स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज प्रणाली को चालू करने में आ रही बाधाओं के कारण हुई। 1 जुलाई, 2026 की सुबह नियमित मार्ग निरीक्षण के दौरान परियोजना दल ने प्रभावित हिस्से की पहचान की और तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। क्षतिग्रस्त भाग की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत की गई, जिससे यातायात का सुरक्षित और निर्बाध संचालन सुनिश्चित किया जा सका। किलोमीटर 55+480 पर निर्मित संतुलन पुलिया को इस तरह डिज़ाइन किया गया था कि वह बारिश के पानी को मीडियन के पार ले जाकर कैरिजवे से सुरक्षित रूप से दूर कर सके, जिससे क्रॉस-ड्रेनेज में आसानी हो। हालांकि, स्थानीय निवासियों के लगातार विरोध के कारण इस पुलिया को जोड़ा और चालू नहीं किया जा सका। स्थानीय निवासियों ने जल निकासी प्रणाली को आपस में जोड़ने की अनुमति नहीं दी है और इसके बजाय वे पुलिया के मुहाने का उपयोग वाहनों के आवागमन के लिए कर रहे है...

अप्रैल 2026 में कोयले के आयात में लगभग 13 % की गिरावट

भारत के कोयला आयात में अप्रैल 2026 में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कुल कोयला आयात अप्रैल 2025 के 24.27 मिलियन टन (एमटी) से घटकर 21.13 मिलियन टन (एमटी) रह गया है , यानी 3.14 मिलियन टन (लगभग 12.95 प्रतिशत ) की कमी आई है।  यह गिरावट कोयला मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से विद्युत क्षेत्र के लिए आयात के विकल्प और घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के प्रभाव को दर्शाती है।   मुख्य विशेषताएं विद्युत क्षेत्र के आयात में भारी गिरावट: घरेलू आपूर्ति में सुधार और मिश्रण के लिए आयातित कोयले पर निर्भरता में कमी के कारण बिजली संयंत्रों द्वारा कोयले का आयात 24.89 प्रतिशत गिरकर अप्रैल 2025 में 4.67 मीट्रिक टन से घटकर अप्रैल 2026 में 3.51 मीट्रिक टन हो गया। आयातित कोयला आधारित (आईसीबी) संयंत्र: आयातित कोयले पर चलने के लिए डिजाइन किए गए संयंत्रों के आयात में 27.45 प्रतिशत की गिरावट आई है , जो 3.97 मीट्रिक टन से घटकर 2.88 मीट्रिक टन हो गया है। यह निगरानी की गई सभी श्रेणियों में सबसे तीव्र गिरावट है। आयातित कोयले के मिश्रण के लिए घरेलू कोयला आधारित (डीसीबी) संयंत्र: मिश्रण...

एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से सुपरअलॉय द्वि-धात्विक संरचनाओं में हुई प्रगति से सुपरअलॉय के आयात में कमी संभव

लेजर-आधारित पाउडर बेड फ्यूजन (पीबीएफ-एलबी/एम) एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग नामक तकनीक का उपयोग करके अनुसंधानकर्ताओं द्वारा विकसित एक दरार-मुक्त द्वि-धात्विक संरचना, महंगी सुपरअलॉय के समग्र इस्तेमाल को कम करने में मदद कर सकती है। इससे इनके आयात पर निर्भरता कम होगी। स्टेनलेस स्टील और निकल आधारित सुपर मिश्रधातुओं का व्यापक रूप से एयरोस्पेस , परमाणु और थर्मल पावर प्लांटों में इस्तेमाल किया जाता है। गैस टरबाइन के कुछ क्षेत्रों में तापमान 2000° सेंटीग्रेड तक पहुंच सकता है , जबकि आस-पास के हिस्से प्रक्रिया की विभिन्न स्थितियों के दौरान कम तापमान के संपर्क में रहते हैं। इसलिए , स्टेनलेस स्टील को निकल आधारित सुपरमिश्रधातुओं के साथ एक ही घटक में संयोजित करना तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि , स्टेनलेस स्टील (एसएस 316 एल ) और इनकोनेल सुपरएलॉय (आईएन 718) की रासायनिक संरचना , गलनांक और तापीय विस्तार गुणांक में अंतर के कारण पारंपरिक वेल्डिंग चुनौतीपूर्ण है। इन अंतरों के कारण अक्सर ठोस स्वरूप प्रदान करने के दौरान दरारें , छिद्रयुक्तता , एनबी / एमओ - समृद्ध चरणों का पृथक्करण और भंगुर अंतर्धात्विकों क...

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण के साथ आंध्र प्रदेश से किया "VB-G RAM G" का राष्ट्रीय शुभारंभ

आंध्र प्रदेश के तिरुपति ज़िले के मुक्कावरिपल्ली गाँव से “विकसित भारत– जी राम जी योजना” का आज राष्ट्रीय शुभारंभ हुआ, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और श्री कमलेश पासवान तथा सांसद‑विधायक और हजारों की संख्या में जनसमुदाय उपस्थित रहे।  इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर के गरीब मजदूरों, किसानों और गाँवों के लिए रोज़गार की गारंटी, ग्राम विकास के लिए बड़े वित्तीय आवंटन और पारदर्शी व्यवस्था के साथ एक नया मॉडल पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना संबोधन “नमः वेंकटेश्वराय” और “गोविंदा, गोविंदा” के जयकारों के साथ शुरू करते हुए कहा कि इस पावन धरती से विकसित भारत जी‑राम जी योजना लागू होना गरीबों और मजदूरों के लिए भगवान की कृपा की वर्षा जैसा है। उन्होंने प्रार्थना की कि देश में कोई भी गरीब मजदूर बिना काम के न रहे, हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी मिले। इसी संक...

कोयला मंत्रालय ने एमएमडीआर कोयला ब्लॉकों के लिए बीमा शुरिटी बांड की स्वीकृति को अधिसूचित किया

कोयला मंत्रालय ने कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करने और कोयला क्षेत्र में व्यापार करने की सुगमता को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सुधार किया है।  कोयला ब्लॉक आवंटन (संशोधन) नियम, 2026 के ज़रिये मंत्रालय ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी (पीबीजी) के स्थान पर बीमा शुरिटी बांड (आईएसबी) के उपयोग की अनुमति प्रदान की है। संशोधित व्यवस्था के अंतर्गत कोयला ब्लॉक आवंटियों को अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी बाध्यता पूरी करने के लिए निष्पादन बैंक गारंटी अथवा बीमा शुरिटी बांड – इनमें में से किसी एक का विकल्प चुनने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा वर्तमान आवंटियों पर भी लागू होगी, जिससे वे निर्धारित शर्तों के अनुसार पहले से जमा कराई गई निष्पादन बैंक गारंटी को बीमा शुरिटी बांड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे। इस कदम से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय बोझ में कमी आने की उम्मीद है तथा कोयला ब्लॉक आवंटी अपने पूंजागत संसाधनों का उपयोग खदान विकास और परिचालन गतिविधियों में अधिक दक्षता से कर सके...

मादक पदार्थों के विरुद्ध एक डिजिटल कवच

सरकार ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग और मादक पदार्थों की तस्करी की प्रमुख सामाजिक एवं जन-स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के रूप में पहचान की है।  यह समस्या केवल किसी व्यक्ति तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि परिवारों, समुदायों और सार्वजनिक सुरक्षा पर भी व्यापक प्रभाव डालती हैं। नागरिकों की मजबूत भागीदारी और सहायता सेवाओं तक उनकी आसान पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने एक ऐसे सुलभ एवं गोपनीय मंच की आवश्यकता महसूस की, जहाँ लोग नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों की सूचना दे सकें और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकें। इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ( एनसीबी ) द्वारा डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन ( डीआईसी ) के सहयोग से 18 जुलाई, 2024 को राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन ‘मानस’ (मादक पदार्थ निषेध आसूचना के न्‍ द्र) का शुभारंभ किया गया। सुरक्षित और प्रौद्योगिकी-संचालित इस मंच के माध्यम से नागरिक नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों की गोपनीय सूचना दे सकते हैं, परामर्श ले सकते हैं तथा किसी भी समय पुनर्वास संबंधी सहायता तक पहुँच सकते हैं।...