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बेहद उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा केंद्र दृष्टि की झारखंड में शरुआत

ऑपरेशन दृष्टि के तहत एक बड़े स्वास्थ्य सेवा अभियान में, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की एक विशेष नेत्र चिकित्सकीय टीम ने मिलिटरी हॉस्पिटल नमकुम, रांची में एक मेगा एडवांस्ड सर्जिकल आई कैंप शुरू किया है। यह कैंप 15-19 जून 2026 के बीच चल रहा है और इसका उद्देश्य 200 से अधिक लाभार्थियों की दृष्टि बहाल करना तथा उनके जीवन की गुणवत्ता निःशुल्क उन्नत नेत्र सर्जरियों के माध्यम से सुधारना है। आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रिफरल), नई दिल्ली के कंसल्टेंट तथा नेत्र विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर डॉ. संजय कुमार मिश्रा की अगुवाई में सर्जिकल टीम फेकोएमल्सिफिकेशन (प्रसाराभिन्न सर्जरी) द्वारा मोतियाबिंद, मिनिमली इनवेसिव ग्लॉकोमा सर्जरी (MIGS) तथा विट्रियो-रेटिनल रोगों के लिए एंटी-VEGF इंट्राविट्रियल इंजेक्शनों सहित कई उन्नत नेत्र संबंधी प्रक्रियाएँ करगी।  पूर्व सैनिकों, सेवाधारियों के आश्रितों और वंचित नागरिकों के लिए व्यापक स्क्रीनिंग जारी है, और कैंप के दौरान बड़ी उपस्थिति की उम्मीद है। मिशन के समर्थन में, विश्वस्तरीय चिकित्सकीय उपकरण भारतीय वायुसेना की सेवा विमानों द्वारा रांची तक एअरलिफ्ट किए गए हैं, ज...

छोटे गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री पर दी गई छूट वापस ली गई

The discount on the sale of cough medicines in small villages has been withdrawn
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) दिनांक 29 दिसंबर 2025 के माध्यम से औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है। यह भारत के राजपत्र असाधारण में भाग II, खंड 3, उप-खंड (i), दिनांक 30 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित हुआ था, जिसमें अनुसूची के, क्रमांक 13, प्रविष्टि 7 के अंतर्गत "दवाओं का वर्ग" शीर्षक से "सीरप" शब्द को हटा दिया गया है।

औषधि नियम, 1945 की अनुसूची 'के' औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के कुछ प्रावधानों से विशिष्ट प्रकार की औषधियों को छूट प्रदान करती है। इस संशोधन से पूर्व, अनुसूची 'के' की प्रविष्टि संख्या 13 के अंतर्गत 1,000 से कम जनसंख्या वाले गांवों में खांसी की दवाइयों की बिक्री की अनुमति थी, जिसके लिए खुदरा बिक्री लाइसेंस संबंधी कुछ प्रावधानों का अनुपालन आवश्यक नहीं था।

उक्त प्रविष्टि से "सीरप" शब्द हटाए जाने के कारण, खांसी की दवाइयों के सीरप पर यह छूट लागू नहीं होगी। परिणामस्वरूप, छोटे गांवों में खांसी की दवाइयों के सीरप की बिक्री और वितरण अब केवल औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के अनुसार विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही किया जाना अनिवार्य होगा।

सीरप बनाने की प्रक्रिया पर नियामक निगरानी को मजबूत करने और छूट के प्रारूप को समकालीन जन स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन किया गया है। आशा है कि इस उपाय से खांसी की दवाइयों के जिम्मेदार वितरण और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही पूरे देश में नियामक मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को सलाह दी जाती है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत लागू लाइसेंसिंग और नियामक आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

ई-गजट अधिसूचना https://egazette.gov.in/WriteReadData/2026/273467.pdf पर देखी जा सकती है।

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