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बेहद उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा केंद्र दृष्टि की झारखंड में शरुआत

ऑपरेशन दृष्टि के तहत एक बड़े स्वास्थ्य सेवा अभियान में, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की एक विशेष नेत्र चिकित्सकीय टीम ने मिलिटरी हॉस्पिटल नमकुम, रांची में एक मेगा एडवांस्ड सर्जिकल आई कैंप शुरू किया है। यह कैंप 15-19 जून 2026 के बीच चल रहा है और इसका उद्देश्य 200 से अधिक लाभार्थियों की दृष्टि बहाल करना तथा उनके जीवन की गुणवत्ता निःशुल्क उन्नत नेत्र सर्जरियों के माध्यम से सुधारना है। आर्मी अस्पताल (रिसर्च एंड रिफरल), नई दिल्ली के कंसल्टेंट तथा नेत्र विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर डॉ. संजय कुमार मिश्रा की अगुवाई में सर्जिकल टीम फेकोएमल्सिफिकेशन (प्रसाराभिन्न सर्जरी) द्वारा मोतियाबिंद, मिनिमली इनवेसिव ग्लॉकोमा सर्जरी (MIGS) तथा विट्रियो-रेटिनल रोगों के लिए एंटी-VEGF इंट्राविट्रियल इंजेक्शनों सहित कई उन्नत नेत्र संबंधी प्रक्रियाएँ करगी।  पूर्व सैनिकों, सेवाधारियों के आश्रितों और वंचित नागरिकों के लिए व्यापक स्क्रीनिंग जारी है, और कैंप के दौरान बड़ी उपस्थिति की उम्मीद है। मिशन के समर्थन में, विश्वस्तरीय चिकित्सकीय उपकरण भारतीय वायुसेना की सेवा विमानों द्वारा रांची तक एअरलिफ्ट किए गए हैं, ज...

एएसआई और डेनमार्क के नेशनल म्यूजियम ने ऐतिहासिक डेनिश जहाज 'ओरेसंड' के जलमग्न पुरातात्विक अन्वेषण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

ASI and the National Museum of Denmark signed a Memorandum of Understanding for the underwater archaeological exploration of the historic Danish ship
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग और डेनमार्क के नेशनल म्यूज़ियम के 'न्योर्ड- सेंटर फ़ॉर मैरीटाइम एंड अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज' (कोपेनहेगन) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

 इसका उद्देश्य 1619 ईस्वी में पुडुचेरी के कराईकल तट के पास दुर्घटनाग्रस्त ऐतिहासिक डेनिश जहाज 'ओरेसंड' के अवशेषों का पता लगाने और उनका दस्तावेजीकरण करने के लिए जलमग्न पुरातात्विक परियोजना शुरू करना है।

समुद्री इतिहास में 'ओरेसंड'  का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भारत पहुंचने वाला पहला डेनिश जहाज़ माना जाता है। भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने के कुछ ही समय बाद, यह जहाज़ कराईकल के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस वजह से, यह डेनमार्क और भारत के बीच शुरुआती समुद्री संबंधों, और साथ ही 17वीं सदी की शुरुआत में हिंद महासागर में समुद्री यात्रा और व्यापार के व्यापक इतिहास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्रोत बन गया है।

समझौता ज्ञापन की शर्तों के तहत, यह परियोजना जहाज के मलबे के संभावित अवशेषों का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके नॉन-इनवेसिव पुरातत्व सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह अन्वेषण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के 'अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग' द्वारा डेनमार्क के नेशनल म्यूज़ियम के सहयोग से किया जाएगा।

यह सहयोग 'अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग' के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन के साथ उसकी पहली संयुक्त पुरातात्विक परियोजना है। उम्मीद है कि इस साझेदारी से भारत और डेनमार्क के बीच अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज पर रिसर्च के क्षेत्र में अकादमिक और वैज्ञानिक सहयोग मजबूत होगा। 

यह पहल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नॉन-इनवेसिव वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से जलमग्न सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और अध्ययन के प्रति दोनों संस्थाओं की साझी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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