चिप कंसोर्टियम ISMC द्वारा भारत में तीन अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर फैसिलिटी लगाने की योजना पर काम फिलहाल रूक गया है, क्योंकि Intel द्वारा इस कंपनी के अधिग्रहण की वजह से कंपनी के प्लान को लागू करने का काम रूक गया है, इससे चिप मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी भारत की योजनाओं को बड़ा झटका लगा है |
भारत में चिप बनाने की Vedanta और ताइवान के फॉक्सकॉन की कोशिश भी काफी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है, इसकी वजह ये है कि उन्हें यूरोपीय चिपमेकर STMicroelectronics को पार्टनर के रूप में जोड़ने में अब तक सफलता नहीं मिल सकी है और इस राह में भी कई रोड़े सामने आ रहे हैं |
इन कंपनियों की योजनाओं का आगे नहीं बढ़ पाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका है, इसकी वजह ये है कि केंद्र सरकार ने चिप मैन्यूफैक्चरिंग को शीर्ष प्राथमिकता में शामिल किया है | सरकार इस प्रोजेक्ट के साथ ग्लोबल कंपनियों को आकर्षित करके भारत में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग के नए युग की शुरुआत की ओर देख रही है |
भारत को उम्मीद है कि 2026 तक देश का सेमीकंडक्टर मार्केट करीब 63 अरब डॉलर का होगा, सरकार ने इसकी अहमियत को समझते हुए 10 अरब डॉलर के प्रोत्साहन स्कीम की घोषणा की थी | पिछले साल उसे इस प्रोत्साहन योजना के लिए तीन आवेदन मिले थे, इनमें वेदांता-फॉक्सकॉन का ज्वाइंट वेंचर, ग्लोबल कंसोर्टियम ISMC शामिल थे, ISMC ने टावर सेमीकंडक्टर को टेक पार्टनर बनाया था, वहीं सिंगापुर स्थित IGSS वेंचर्स ने भी इस योजना के लिए अप्लाई किया था |
वेदांता जेवी की गुजरात में चिप फैक्ट्री लगाने की योजना है., वहीं ISMC और IGSS दोनों ने दो अलग-अलग दक्षिणी राज्यों में तीन-तीन अरब डॉलर की चिप फैक्ट्री लगाने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी |
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