रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) ने छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (पीआईएल) अधिसूचित की है, जिसमें सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 405 वस्तुएं शामिल हैं। इनका अनुमानित व्यापार मूल्य 3,070 करोड़ रुपये है। इस सूची में लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चा माल शामिल हैं। इनमें भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की 16 वस्तुएं और सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) की 389 वस्तुएं शामिल हैं। ये वस्तुएं रक्षा प्लेटफार्मों और प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करती हैं, जिनमें शामिल हैं: एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, एसयू-30एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन जैसे एयर प्लेटफॉर्म। टी-72, टी-90 और बीएमपी-II सहित बख्तरबंद प्लेटफॉर्म युद्धपोतों कोंकर्स-एम, इन्वार और एमआरएसएएम जैसी मिसाइल प्रणालियां रडार, सोनार, अग्नि नियंत्रण प्रणाली और उपग्रह संचार प्रणाली सहित रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स उच्च विस्फोटक टैंक-रोधी गोला-बारूद और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण (405 वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची) 40...
कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल, 2026 को वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें दौर के शुभारंभ के साथ-साथ "आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला" विषय पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम मुंबई में होगा और इसमें कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त मुख्य अतिथि होंगे। यह पहल भारत में ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी की शानदार सफलता के आधार पर, कोयला मंत्रालय विकास, दक्षता और आत्मनिर्भरता पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करते हुए भारत के ऊर्जा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से, इस पहल ने घरेलू कोयले की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि की है और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया है।
आगामी 15वां चरण इस प्रगतिशील यात्रा को आगे बढ़ाता है, जिसमें कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने, विविध निवेशों को आकर्षित करने और उद्योग की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे उदार शर्तों पर कोयला खदानें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस चरण में पूरी तरह से खोजे गए और आंशिक रूप से खोजे गए कोयला ब्लॉकों का एक नया सेट पेश किया जाएगा, जिसमें अनुभवी खनिकों, नए प्रवेशकों और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमों को समान रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। कोयला क्षेत्र में एक जीवंत और प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम को बढ़ावा देने से इसके और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है, साथ ही निवेश में वृद्धि, रोजगार सृजन और समग्र क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की प्रक्रिया ने पारदर्शिता लाकर, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर और सभी प्रतिभागियों के लिए समान अवसर प्रदान करके कोयला क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किया है। इसने घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है और आत्मनिर्भर भारत के विजन को बल मिला है।
वाणिज्यिक कोयला खनन आर्थिक प्रगति का एक प्रमुख कारक बनकर उभरा है, जिससे कोयला उत्पादन में वृद्धि हुई है और देश भर के उद्योगों के लिए स्थिर तथा विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आगामी दौर का निवेश इस मजबूत आधार को और सुदृढ़ करेगा तथा इस क्षेत्र और इसकी भविष्य की संभावनाओं में विश्वास और बढ़ेगा।
कोयला मंत्रालय देश के लिए विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा सुनिश्चित करने के साथ-साथ इस क्षेत्र में सतत विकास, नवाचार और दीर्घकालिक मजबूती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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