‘स्माइल’ क्या है? अपनापन से जुड़ने का सेतु
भारत एक अरब कहानियों का देश है-और एक ऐसी सरकार का, जो यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि हर कहानी सुनी जाए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वे कहानियाँ हैं, जो उन समुदायों से जुड़ी हैं जो लंबे समय से अवसरों के हाशिये पर रहे हैं। इनमें दो प्रमुख समूह हैं- एक हैं ट्रांसजेंडर व्यक्ति, जो अक्सर ऐसी दुनिया में जीवन जीते हैं जो उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई है, और दूसरे हैं वे लोग जो भिक्षावृत्ति में लगे हैं, जिनकी परिस्थितियां अक्सर सहायता और अवसरों की कमी को दर्शाती हैं।
इन समुदायों में अपार क्षमताएं होती हैं, जिन्हें सही सहायता और हस्तक्षेप के माध्यम से साकार किया जा सकता है।
भारत में पहले से ही स्वास्थ्य, आवास, शिक्षा और आजीविका के लिए मजबूत कल्याणकारी योजनाओं का एक सशक्त इकोसिस्टम मौजूद है। हालांकि, जो कमी थी, वह एक समर्पित सेतु की-जो इन वंचित समुदायों को उपलब्ध अवसरों से जोड़ सके और साथ ही उन बाधाओं को दूर कर सके, जिनका वे सामना करते हैं, जैसे दस्तावेज़ों की कमी, सीमित जागरूकता और सेवाओं तक पहुंच में कठिनाई।
‘स्माइल’- सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज — उसी सेतु की भूमिका निभाता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय(1) द्वारा 12 फरवरी 2022 को शुरू की गई यह योजना भारत का पहला एकीकृत राष्ट्रीय ढांचा है, जो इन समुदायों को हर चरण पर सहायता प्रदान करने के लिए बनाया गया है-पहचान और बचाव से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुंच, परामर्श, कौशल विकास और दीर्घकालिक आर्थिक आत्मनिर्भरता तक।
इरादे के पीछे निवेश
‘‘स्माइल’ योजना के तहत वर्ष 2021–22 से 2025–26 की अवधि के लिए कुल 365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 265 करोड़ रुपये ट्रांसजेंडर कल्याण के लिए और 100 करोड़ रुपये भिक्षावृत्ति पुनर्वास (2) के लिए निर्धारित हैं। हर वर्ष आवंटन में क्रमिक वृद्धि की गई है, जो दोनों उप-योजनाओं के विस्तार के प्रति सरकार के संकल्प को दर्शाता है।
Year | Transgender Welfare (₹ Cr) | Beggary Rehabilitation (₹ Cr) | Total (₹ Cr) |
2021–22 | 25 | 10 | 35.00 |
2022–23 | 46.31 | 15 | 61.31 |
2023–24 | 52.91 | 30 | 82.91 |
2024–25 | 63.90 | 33 | 96.90 |
2025–26 | 76.88 | 37 | 113.88 |
TOTAL | 265 | 125 | 390 |
भारत के ट्रांसजेंडर समुदाय का साथ देना
भारत ने ट्रांसजेंडर समुदाय की ऐतिहासिक उपेक्षा को दूर करने के लिए व्यापक कानूनी संरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल पहुंच के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है। यह बदलाव भारतीय समाज में समावेशिता और समानता को बढ़ावा देने के बढ़ते प्रयासों को दर्शाता है।
भारत सरकार ने यह समझते हुए कि इस समुदाय को राज्य से सुरक्षा और समर्थन मिलना चाहिए, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 लागू किया, जो भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच की गारंटी देता है। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के समग्र पुनर्वास के लिए ‘स्माइल’ योजना के अंतर्गत संचालित उप-योजना इस अधिनियम (3) के अनुरूप एक प्रमुख सरकारी पहल है।
मुख्य घटक: (4)
ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियां
यह योजना कक्षा 9 से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक (जिसमें माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, स्नातक, स्नातकोत्तर तथा यूजीसी, एआईसीटीई या एनसीवीटी के अंतर्गत मान्यता प्राप्त तकनीकी/व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं) ट्रांसजेंडर छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
पात्रता के लिए राष्ट्रीय पोर्टल से जारी वैध ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र, किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में पूर्णकालिक नामांकन (जिसमें स्वीकृत दूरस्थ/पत्राचार पाठ्यक्रम भी शामिल हैं) तथा किसी अन्य केंद्रीय/राज्य छात्रवृत्ति का लाभ न लेना आवश्यक है। यह सहायता प्रत्येक कक्षा/स्तर के लिए केवल एक शैक्षणिक वर्ष तक ही सीमित है (रिपीट वर्षों के लिए नहीं)।
कौशल विकास एवं आजीविका
‘पीएम-दक्ष’ (प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही योजना) एक राष्ट्रीय कौशल विकास योजना है, जो अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (ईबीसी), सफाई कर्मचारी और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों सहित वंचित समुदायों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका सहायता प्रदान करती है, ताकि उनकी रोजगार क्षमता और आय में वृद्धि हो सके।
इस योजना के तहत प्रशिक्षण को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और सेक्टर स्किल काउंसिल्स के माध्यम से संचालित किया जाता है, जबकि उद्यमिता कार्यक्रम भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई) और राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान ( एनआईईएसबीयूडी) द्वारा संचालित किए जाते हैं। इस योजना को पारदर्शी निगरानी के लिए ‘पीएम-दक्ष’ आईटी प्लेटफ़ॉर्म और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के राष्ट्रीय पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। देश भर में 18 उद्यमिता विकास कार्यक्रम पायलट आधार पर शुरू किए गए हैं, जिनके तहत 1,800 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को व्यवसाय योजना, बाज़ार विश्लेषण, नियामक संबंधी अनुपालन, वित्तीय पहुंच और इन्क्यूबेशन केंद्रों/बैंकों से जुड़ाव जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
समग्र चिकित्सा स्वास्थ्य
पीएम-जय (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना /आयुष्मान भारत) के साथ समन्वय के तहत एक व्यापक स्वास्थ्य पैकेज प्रदान किया जाता है, जिसमें सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से जेंडर-रीअफर्मेशन से संबंधित प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।
‘गरिमा गृह’ (आश्रय गृह)
2021 में पायलट आधार पर शुरू किए गए ‘गरिमा गृह’ आश्रय गृह उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास प्रदान करते हैं, जो परिवार द्वारा अस्वीकार किए जाने या सामाजिक कलंक के कारण बेघर हो जाते हैं। प्रत्येक आश्रय गृह में भोजन, चिकित्सा सुविधा, मनोरंजन की व्यवस्था और स्थल पर ही कौशल विकास की सहायता उपलब्ध करायी जाती है। इनका संचालन समुदाय आधारित संगठनों (सीबीओ) द्वारा किया जाता है, जिन्हें सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
ट्रांसजेंडर सुरक्षा प्रकोष्ठ
प्रत्येक राज्य में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की निगरानी करने तथा ऐसे मामलों में त्वरित पंजीकरण, जांच और अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित ‘ट्रांसजेंडर संरक्षण प्रकोष्ठ’ स्थापित किया जाना आवश्यक है। ये प्रकोष्ठ ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत दिए गए अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमुख माध्यम हैं, जो कानूनी प्रावधानों को जमीनी स्तर पर ठोस समाधान में बदलते हैं।
राष्ट्रीय पोर्टल और हेल्पलाइन
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल (transgender.dosje.gov.in) एक एकल डिजिटल माध्यम के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र और पहचान पत्र जारी किए जाते हैं। ये प्रमाणपत्र ‘‘स्माइल’ योजना और अन्य सरकारी लाभों तक पहुंच के लिए अनिवार्य हैं।
‘‘स्माइल’ द्वारा वित्तपोषित सभी 'गरिमा गृहों' को निगरानी और जवाबदेही के लिए जियोटैग किया गया है।
यह योजना कैसे काम करती है?
यह योजना कई स्तर पर संचालित की जाती है-कार्यान्वयन प्राधिकरणों जैसे जिला प्रशासन, शहरी स्थानीय निकाय, नगर निगम और भिक्षावृत्ति निवारण के क्षेत्र में कार्यरत अन्य एजेंसियों के माध्यम से।
इससे यह सुनिश्चित होता है कि सहायता लोगों तक उनके स्थान पर और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
यह योजना क्या करती है?
सर्वेक्षण और पहचान: सबसे पहले स्थानीय टीमें अपने क्षेत्र में भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों की पहचान करती हैं।
प्रेरणा और परामर्श: इसके बाद पहचाने गए व्यक्तियों को मौके पर परामर्श के जरिये प्रेरित किया जाता है और इस प्रक्रिया में लगे कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें पुलिस, स्वयंसेवकों और अन्य एजेंसियों का महत्वपूर्ण सहयोग होता है।
आश्रय और देखभाल: व्यक्तियों को सुरक्षित रूप से आश्रय गृहों में लाया जाता है, जहां उन्हें भोजन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं।
कौशल विकास: इसके बाद उन्हें बढ़ईगीरी, सिलाई, खाना बनाना, बागवानी, सुरक्षा कार्य, स्वच्छता और ई-रिक्शा चलाने जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आजीविका कमा सकें। ‘स्वयं सहायता समूह’ गठित किये जाते हैं और उन्हें बैंकों से जोड़ा जाता है, जिससे वे वित्तीय सहायता प्राप्त कर अपने कार्य शुरू कर सकें।
समेकन और पुनर्वास: जिन लोगों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है-जैसे बुजुर्ग या नशा मुक्ति की प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति, तो उन्हें वृद्धाश्रम, नशामुक्ति केंद्र और अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। पुनर्वास के बाद भी निरंतर निगरानी की जाती है ताकि वे दोबारा उसी स्थिति में न लौटें। इसके साथ ही व्यक्तिगत परामर्श, समूह चिकित्सा, पुनःशिक्षा सत्र और पारिवारिक कक्षाओं की भी व्यवस्था होती है।
‘स्माइल’ की भिक्षावृत्ति उप-योजना इस समय देश के 181 चयनित शहरों में लागू है।(7) पुनर्वास केंद्रों और आश्रय गृहों के विवरण का संकलन, पंजीकरण और उनकी निगरानी ‘स्माइल’ -भिक्षावृत्ति राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से की जाती है।
‘स्माइल’ की भिक्षावृत्ति उप-योजना इस समय देश के 181 चयनित शहरों में लागू है।(8) पुनर्वास केंद्रों और आश्रय गृहों के विवरण का संकलन, पंजीकरण और उनकी निगरानी ‘स्माइल’-भिक्षावृत्ति राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से की जाती है।
बचाव और पुनर्वास की कहानियां
‘स्माइल’ योजना अपनी प्रगति को इस आधार पर मापती है कि कितने शहर कवर किये गये, कितने लोगों की पहचान की गयी और कितने लोगों का पुनर्वास हुआ। लेकिन हर संख्या के पीछे एक कहानी होती है-सड़कों से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा, निराशा से सम्मान तक का सफर। ज्योति और सुनील ऐसी ही दो प्रेरक यात्राओं के उदाहरण हैं।
आगे का रास्ता
‘स्माइल’ योजना इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि भारत अपने सबसे वंचित नागरिकों के कल्याण के प्रति किस प्रकार एक नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है-जहां एक समस्या के लिए अलग-अलग योजनाओं की बजाय एक समेकित ढांचा अपनाया गया है, जो पहचान, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और आश्रय जैसे सभी पहलुओं का समाधान एक साथ निकालता है। इसका मूल तर्क स्पष्ट है: जब उपेक्षा बहुआया मी है, तो उसका समाधान भी समग्र होना चाहिए।
‘स्माइल’ को पूर्व की कल्याणकारी पहलों से जो अलग बनाता है वह है संरचनात्मक परिवर्तन पर इसका जोर। इसके प्रत्येक घटक का उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां निर्मित करना है, जहां भविष्य में राहत की आवश्यकता ही न रहे। इसका अंतिम लक्ष्य किसी योजना पर निर्भरता नहीं, बल्कि समाज में पूर्ण और सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह उद्देश्य इसके लगातार बढ़ते बजट, कार्यान्वयन भागीदारों के विस्तृत नेटवर्क और हर वर्ष बढ़ती पहुंच में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ‘स्माइल’ वास्तव में अपने नाम के अनुरूप एक ऐसी पहल है, जो इस विश्वास पर आधारित है कि गरिमा कोई ऐसा विशेषाधिकार नहीं है जिसे चुनिंदा लोगों को दिया जाए- बल्कि यह हर व्यक्ति का अधिकार है, बिना किसी अपवाद के।

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