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जबलपुर क्रूज हादसे पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार शाम को हुए क्रूज हादसे के बाद एक्टर सोनू सूद ने सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोनू सूद ने लिखा, ' कुछ समय पहले मैंने बिहार नाव हादसे पर ट्वीट किया था और कहा था कि हर यात्री के लिए लाइफ जैकेट जरूरी होनी चाहिए। फिर वृंदावन में हादसा हुआ… और अब मध्य प्रदेश में भी, उसी तरह लोगों की जान चली गई। आखिर कब तक? अब समय आ गया है कि इसे सख्ती से लागू किया जाए, कोई भी नाव तब तक न चले, जब तक हर यात्री लाइफ जैकेट न पहने।' एक्टर ने आगे लिखा ही, 'एक सरकारी पोर्टल होना चाहिए, जहां हर यात्रा से पहले टाइम के साथ यह सबूत अपलोड हो कि सभी यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी है। सिर्फ सख्त नियम और जवाबदेही ही लोगों की जान बचा सकते हैं।' गुरुवार शाम पर्यटकों से भरा क्रूज डूब गया था :- जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में गुरुवार शाम करीब 5 बजे MP टूरिज्म का पर्यटकों से भरा क्रूज डूब गया था। इस पर लगभग 47 पर्यटक सवार थे, जबकि टिकट सिर्फ 29 लोगों की ही कटी थी। हादसा किनारे से करीब 300 मीटर दूर हुआ। जिस समय क्रूज डूबा, उस वक...

भारत में चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन की पहल

भारत में चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन की पहल
दुनिया भर मेंस्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागतलंबे समय तक प्रतीक्षा समय और जीवन शैली से जुड़े रोगों का बढ़ता बोझ रोगियों को विदेश में इलाज कराने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस वैश्विक बदलाव ने बहु-अरब डॉलर के  मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटीउद्योग का उदय किया है।

वर्ष 2022 में वैश्विक मेडिकल वैल्यू ट्रैवल बाजार का मूल्य लगभग 115.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।इसके वर्ष 2030 तक लगभग 286.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। बाजार लगभग 10.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआरसे बढ़ रहा है।

भारत इस विकसित वैश्विक परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक गंतव्‍य के रूप में उभरा है। उद्योग का अनुमान है कि वर्ष 2025 में चिकित्सा पर्यटन बाजार लगभग 8.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का होगाजिसमें वर्ष 2030 तक 16.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुमान है।

सदियों सेभारत को उपचारसंतुलन और रोग मुक्ति की इच्‍छा रखने वाले लोगों के लिए एक मुख्‍य गंतव्‍य के रूप में माना जाता रहा है।आजयह प्राचीन विरासत एक गतिशील मेडिकल वैल्यू ट्रैवल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हुई है। यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को पारंपरिक प्रणालियों के कालातीत ज्ञान के साथ जोड़ता है।

प्रमुख "हील इन इंडिया" पहल के माध्यम सेसरकार देश को एकीकृत और समग्र स्वास्थ्य सेवा के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है।

इस परिदृश्य के दायरे को समझने के लिएइसके दो जीवंत स्तंभों के बीच अंतर करना आवश्यक है:

  • चिकित्सा पर्यटनयह जटिल सर्जरीअंग प्रत्यारोपण और विशेष अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली उन्नत नैदानिक देखभाल जैसे उपचारात्मक हस्तक्षेपों पर केंद्रित है।
  • वेलनेस टूरिज्मयह योगआयुर्वेदप्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष प्रथाओं जैसी पारंपरिक प्रणालियों के माध्यम से निवारक और समग्र स्‍वास्‍थ्‍य पर केंद्रित है। यह ऐसे उपचार प्रदान करता है जो शारीरिकमानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।

साथ हीये दोनों स्तंभ भारत के मेडिकल वैल्यू ट्रैवल इकोसिस्टम की आधारशिला बनाते हैं। ये उन्नत नैदानिक उपचार आवश्यकताओं और निवारक स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती वैश्विक मांग दोनों का समाधान प्रदान करते हैं।

चिकित्सा पर्यटन सूचकांक वर्ष 2020-21 के अनुसार:

  • भारत विश्व स्तर पर शीर्ष 46 चिकित्सा पर्यटन स्थलों में 10वें स्थान पर है
  • दुनिया के शीर्ष 20 वेलनेस पर्यटन बाजारों में 12वें स्थान पर है।
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शीर्ष 10 स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल स्थलों में से 5वें स्‍थान पर है

 

वर्ष 2025-26 सांख्यिकीय परिदृश्य

पर्यटन मंत्रालय के अनुमानों के अनुसारवित्त वर्ष 2024 मेंयात्रा और पर्यटन ने सकल घरेलू उत्पाद में 5.22 प्रतिशत का योगदान दियाजो महामारी से पहले के स्तर के करीब है। इस क्षेत्र ने अनुमानित 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों का भी समर्थन कियाजो कुल रोजगार का लगभग 13.3 प्रतिशत है

वर्ष 2025 के लिए नवीनतम डेटा क्षेत्र की गति को उजागर करता है:

  1. विदेशी पर्यटक आगमन (एफटीए): वर्ष 2025 में भारत ने 9.15 मिलियन एफटीए दर्ज किए
  2. चिकित्सा उद्देश्य आगमनवर्ष 2025 में507,244 विदेशी नागरिक विशेष रूप से चिकित्सा उपचार के लिए पहुंचे।
  3. क्षेत्रीय हिस्सेदारीवर्ष 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि चिकित्सा पर्यटन कुल एफटीए का लगभग 5.5 प्रतिशत है।

  1. अग्रणी बाजार: वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसारचिकित्सा पर्यटकों के लिए शीर्ष स्रोत देशों में शामिल हैंबांग्लादेश (3,25,127 आगमन), इसके बाद इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9738) और केन्या (9,357)
  2. अन्य देशों के रोगी मुख्य रूप से विशेष उपचार के लिए भारत की यात्रा करते हैं जैसे:
  • हृदय शल्य चिकित्सा
  • आर्थोपेडिक प्रक्रियाएं
  • कैंसर उपचार
  • अंग प्रत्यारोपण
  • न्यूरोलॉजिकल उपचार
  • कॉस्मेटिक सर्जरी
  • दंत चिकित्सा देखभाल
  • प्रजनन उपचार
  • आयुष आधारित वेलनेस थेरेपी

भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़तगुणवत्ताविशेषज्ञता और सामर्थ्य

भारत के पास एक अनूठा लाभ है जो इसे चिकित्सा पर्यटन सूचकांक (एमटीआईमें विश्व स्तर पर 10वें स्थान पर रखता है। सरकार इस प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के कई स्तंभों की पहचान करती है:

मजबूत चिकित्सा संसाधन

भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली प्रशिक्षित चिकित्सा पेशेवरों के दुनिया के सबसे बड़े पूल में से एक द्वारा समर्थित है।

भारत में 69,364 अस्पताल (43,486 निजी अस्पताल और 25,778 सार्वजनिक अस्पतालहैंजिनमें 1.2 मिलियन पंजीकृत चिकित्‍सक हैंजो डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित चिकित्‍सक जनसंख्या अनुपात प्राप्त करते हैं।

इसके अलावाअंग्रेजी भारत में चिकित्सा शिक्षा और नैदानिक अभ्यास की प्राथमिक भाषा के रूप में कार्य करती हैजो अंतरराष्ट्रीय रोगियों के साथ आसान संवाद को सक्षम बनाती है। पिछले एक दशक मेंभारत ने अपनी चिकित्सा शिक्षा क्षमता और स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे का काफी विस्तार किया है। इसने विशेष विषयों में कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता को मजबूत किया है।

उन्नत प्रौद्योगिकी और प्रमाणित

भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली मजबूत गुणवत्ता आश्वासन तंत्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मान्यता मानकों द्वारा समर्थित है। देश भर के अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता  अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएचसे मान्यता प्राप्त करते हैं

एनएबीएच रोगी की सुरक्षा और देखभाल की गुणवत्ता के लिए कठोर बेंचमार्क स्थापित करता है। 2026 तकएनएबीएच ने 600 से अधिक सुरक्षा मापदंडों का उपयोग करके 1,299 से अधिक अस्पतालों को मान्यता दी है। इस बीचभारतीय गुणवत्ता परिषद व्यवस्थित गुणवत्ता सुधार की देखरेख करती है।

एनएबीएच मान्यता को इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर क्वालिटी इन हेल्थकेयर (आईएसक्‍यूयूए) के साथ संबद्धता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है। इसके अलावाकई भारतीय अस्पतालों को संयुक्त कमीशन इंटरनेशनल (जेसीआईमान्यता  प्राप्त है। यह अस्पतालों को स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों के बीच रखता है जो नैदानिक उत्कृष्टता के विश्व स्तर पर स्वीकृत मानकों को पूरा करते हैं।

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटीसेवा प्रदाता मुख्य रूप से भारत के दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में केंद्रित हैं। वर्ष 2022 तक,  जेसीआई-मान्यता प्राप्त अस्पताल वाले केन्द्रित शहर  इस प्रकार है:

 

शहर

जेसीआई प्रमाणित अस्‍पतालों की संख्‍या

दिल्‍ली

9

मुंबई

6

बैंगलोर

3

चेन्‍नई

2

हैदराबाद

2

अहमदाबाद

2

कोलकाता

1

नागपुर

1

कोच्चि

1

सेवा प्रदाताओं पर केन्द्रित अन्य उल्लेखनीय शहरों में पुणे  और नासिक शामिल हैं.

लागत प्रभावी चिकित्सा उपचार

भारत की चिकित्सा पर्यटन अपील इसकी लागत प्रतिस्पर्धात्मकता से काफी मजबूत हुई है। भारत में उच्च गुणवत्ता वाला चिकित्सा उपचार अक्सर कई विकसित देशों की तुलना में काफी कम लागत पर उपलब्ध होता हैजबकि तुलनीय नैदानिक मानकों को बनाए रखता है।

यह सामर्थ्य उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी और कुशल पेशेवरों द्वारा समर्थित है यह अंतरराष्ट्रीय रोगियों को लंबी प्रतीक्षा अवधि के बिना विशेष उपचार तक पहुंचने में सक्षम बनाता है   

आयुष के नेतृत्व वाले मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को मजबूत करना

भारत को अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के माध्यम से स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन में एक अनूठा लाभ हैजिसे सामूहिक रूप से आयुषआयुर्वेदयोगप्राकृतिक चिकित्सायूनानीसिद्ध और होम्योपैथी के रूप में जाना जाता है।

भारत, योग और आयुर्वेद के जन्मस्थान के रूप में इन प्रणालियों को समग्र स्वास्थ्य और निवारक देखभाल के अभिन्न घटकों के रूप में बढ़ावा देना जारी खे हुए है।

  • आयुष वीजा सुविधाअंतरराष्ट्रीय रोगियों के लिए पहुंच को सुव्यवस्थित करने के लिएभारत सरकार ने 27 जुलाई 2023 को एक समर्पित आयुष वीजा का शुभारंभ किया। यह विदेशी नागरिकों और उनके परिचारकों को मान्यता प्राप्त आयुष प्रणालियों के अंतर्गत उपचार के लिए विशेष रूप से भारत की यात्रा करने में सक्षम बनाता है।
  • गुणवत्ता मानकक्षेत्र में विश्वसनीयता और मानकीकरण को मजबूत करने के प्रयास चल रहे हैं। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएसने आईएसओ 22525 को अपनाया हैजो चिकित्सा स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन सेवाओं से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय मानक है।
  • बीमा कवरेजआयुष उपचारों के लिए बीमा कवरेज में भी काफी विस्तार हुआ है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआईके स्वास्थ्य बीमा विनियमों के अंतर्गतबीमाकर्ताओं को आयुष के तहत उपचार को कवर करने की अनुमति है। परिणामस्वरूपलगभग 27 बीमा कंपनियां अब आयुष उपचार को कवर करने वाले 140 से अधिक पॉलिसी उत्पादों की पेशकश करती हैं।
  • वैश्विक जुड़ाव और इकोसिस्टम विकासप्रमुख आयुष पहलों में मेडिकल वैल्यू ट्रैवल एक प्रमुख विषय बना हुआ है। इसमें मुंबई (2024) और चेन्नई (मई 2025) में आयोजित "आयुष में वैश्विक सामंजस्‍यमेडिकल वैल्यू ट्रैवल के माध्यम से स्वास्थ्य और कल्याण में बदलावशिखर सम्मेलन शामिल है।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र कौशल परिषद के अंतर्गत आयुष उप-परिषद जैसी पहलों के माध्यम से क्षमता निर्माण को मजबूत किया जा रहा है।
  • ब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन समिटभारत को जानो कार्यक्रम और महाकुंभ मेला 2025 के दौरान प्रदर्शित आयुष पहल जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से भी वैश्विक पहुंच का विस्तार हो रहा है।

 

रणनीतिक पहलकेंद्रीय बजट 2026-27 की मुख्य विशेषताएं

भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 के माध्यम से वैश्विक चिकित्सा केंद्र के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करने के लिए एक दूरदर्शी मार्ग का अनावरण किया है।

क्षेत्रीय चिकित्सा केन्‍द्र

एक प्रमुख प्रस्ताव में राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में देश भर में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना शामिल  है  इन केन्‍द्रों को एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल परिसरों के रूप में डिजाइन किया गया है  जो एक ही छत के नीचे चिकित्साशैक्षिक और अनुसंधान सुविधा प्रदान करेंगे

व्यापक उपचार अनुभव सुनिश्चित करने के लिए इन केंद्रों में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:

  • विशेष केन्‍द्र: प्रत्येक केन्‍द्र  में आयुष केन्‍द्र और समर्पित चिकित्सा मूल्य पर्यटन (एमवीटीसुविधा केन्‍द्र शामिल होंगे
  • एंड-टू-एंड देखभाल: उन्नत निदानउपचार के बाद की देखभाल और पुनर्वास के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
  • रोजगार सृजन: इन परिसरों से चिकित्‍सकों और संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (एएचपीके लिए विविध रोजगार अवसरों के सृजित होने की आशा है।

स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बुनियादी ढांचा

आधुनिक स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के अलावासरकार चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों में देश की क्षमता का भी विस्तार कर रही है।

  •  आयुर्वेद में शिक्षाअनुसंधान और नैदानिक सेवाओं को बढ़ाने के लिए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना  का प्रस्ताव किया गया है।
  • इसके साथ हीजामनगर में डब्‍ल्‍यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को दस्तावेज़-आधारित अनुसंधान और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।

ये पहल भारत के स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम के पूरक स्तंभों के रूप में चिकित्सा उपचार सेवाओं और स्‍वास्‍थ्‍य-आधारित उपचार परंपराओं दोनों को विकसित करने के लिए सरकार के एकीकृत दृष्टिकोण को दर्शाती  हैं।

 

गुणवत्ता और शासन के लिए प्रारूप

भारत के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बनाए रखने के लिए पर्यटन मंत्रालय ने चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति और प्रारूप तैयार किया है।

प्रारूप शासन के तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है:

  • संस्थागत ढांचाराष्ट्रीय चिकित्सा और कल्याण पर्यटन संवर्धन बोर्ड (एनएमडब्‍ल्‍यूटीबीमंत्रालयोंराज्य सरकारों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय के लिए एक छत्र संगठन के रूप में कार्य करता है।
  • गुणवत्ता आश्वासनसरकार अस्पतालोंकल्याण केंद्रों और दंत चिकित्सा क्लीनिकों के लिए एनएबीएच मान्यता को मजबूत कर रही है। यह अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाने के लिए मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटीफैसिलिटेटर्स के पंजीकरण और रेटिंग को भी प्रोत्साहित कर रहा है।
  • कौशल और क्षमता निर्माणकेंद्रीय बजट 2026-27 में 12 सप्ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के माध्यम से 20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में 10,000 गाइडों को कौशल प्रदान करने के लिए एक पायलट योजना का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्तपैरामेडिकल और गैर-चिकित्सा कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय रोगियों की बेहतर सेवा देने के लिए क्रॉस-सांस्कृतिक संवेदनशीलता और विदेशी भाषाओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

इन शासन और गुणवत्ता उपायों को एकीकृत करके सरकार का लक्ष्य भारत को  समग्र उपचार के लिए 365-दिवसीय गंतव्य के रूप में पेश करना है। इस एकीकृत संचार रणनीति को "अतुल्य भारतके उप-ब्रांड के रूप में प्रचारित किया जाता है इन पहलों के माध्यम सेभारत "समग्र स्वास्थ्य क्रांतिके लिए एक अधिक औपचारिकविनियमित और विश्वसनीय वैश्विक केंद्र की ओर बढ़ रहा है।

सरकारी सुविधा और डिजिटल परिवर्तन

सरकार ने मजबूत डिजिटल और नीतिगत हस्तक्षेपों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय रोगियों की यात्रा को सुव्यवस्थित किया है। इसकी आधारशिला उदारीकृत वीजा व्यवस्था हैजहां -मेडिकल वीजा और -मेडिकल अटेंडेंट वीजा सुविधाओं को 172 देशों के नागरिकों तक बढ़ाया गया है

इसके अतिरिक्त,  पारंपरिक भारतीय उपचार की इच्‍छा रखने वालों की सहायता के लिए -आयुष वीजा और -आयुष अटेंडेंट वीजा जैसी नई श्रेणियां  शुरू की गई हैं।

डिजिटल पहल "हील इन इंडियाअनुभव को और बढ़ा रही हैं:

  • संशोधित एमवीटी पोर्टल: सरकार "एंड-टू-एंडसमाधान प्रदान करने के लिए  वन-स्टॉप मेडिकल वैल्यू ट्रैवल पोर्टल को अपग्रेड कर रही है  यह रोगियों को सेवाओं का पता लगानेयोजना बनाने और बुक करने के साथ-साथ भुगतान करने और ऑपरेशन के बाद की देखभाल तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
  • हवाई अड्डे की सुविधा: योजनाओं में महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर एमवीटी कंसीयज और लाउंज स्थापित करना शामिल है  यह एयरोब्रिज पर यात्रियों का स्वागत करने और आप्रवासनसीमा शुल्क और सामान के दावों के माध्यम से उनकी सहायता करने के लिए है।

 

चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन के लिए संस्थागत तंत्र

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के समन्वित विकास को सुनिश्चित करने के लिएसरकार ने एक संस्थागत ढांचा स्थापित किया है।

राष्ट्रीय चिकित्सा और कल्याण पर्यटन संवर्धन बोर्ड (एनएमडब्ल्यूटीबी): वर्ष 2015 में पर्यटन मंत्रालय द्वारा गठितकेंद्रीय पर्यटन मंत्री की अध्यक्षता में यह भारत में चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन को बढ़ावा देता है और सुविधा प्रदान करता है।

बहु-हितधारक मंचबोर्ड मंत्रालयोंराज्य सरकारोंअस्पतालोंकल्याण केंद्रोंमान्यता निकायों और उद्योग हितधारकों को एक साथ लाता है। साथ मेंवे मेडिकल वैल्यू ट्रैवल इकोसिस्टम को मजबूत करते हैं।

राज्य-स्तरीय समन्वयराज्यों को क्षेत्रीय विकास और संवर्धन का समर्थन करने के लिए समर्पित चिकित्सा और कल्याण पर्यटन संवर्धन बोर्ड या प्रकोष्ठ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

 

स्‍वास्‍थ्‍य और सांस्कृतिक एकीकरण को बढ़ावा देना

वेलनेस टूरिज्म भारत की व्यापक स्वास्थ्य पर्यटन रणनीति के एक महत्वपूर्ण घटक का प्रतिनिधित्व करता है। योगध्यानआयुर्वेद और आध्यात्मिक उपचार में देश की समृद्ध परंपराएं सांस्कृतिक पर्यटन के साथ कल्याण को एकीकृत करने के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करती हैं।

समग्र स्वास्थ्य के लिए एक वैश्विक ब्रांड के रूप में योग

योग प्राचीन भारतीय परंपरा का एक अमूल्य उपहार है जो संस्कृत मूल 'युज' (जिसका अर्थ है "शामिल होनाया "एकजुट होना") से लिया गया है। यह भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर की आधारशिला के रूप में उभरा है। यह मनशरीरविचार एवं कार्य की एकता का प्रतीक हैऔर कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।

 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाईवर्ष 2025 ने  राष्ट्रीय और वैश्विक चेतना में कल्याण को एकीकृत करने के लिए प्राथमिक माध्यम के रूप में कार्य किया।"एक पृथ्वीएक स्वास्थ्य के लिए योग" विषय के अंतर्गत  इस कार्यक्रम ने योग को स्थिरता और वैश्विक कल्याण के साथ जोड़ा।

  1. भारत को योग  और पारंपरिक उपचारों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित किया गया हैजो विदेशी पर्यटकों के आगमन (एफटीए) को आकर्षित करता है, वे विशेष रूप से अपनी स्‍वस्‍थ जीवन शैली को बनाए रखने या निवारक स्वास्थ्य देखभाल की तलाश करने के लिए यात्रा करते हैं, सरकार की समर्पित -आयुष वीजा सुविधा से यह यात्रा अब काफी सुव्यवस्थित हो गई है।

 

ग्लोबल हीलिंग हब की ओर

भारत का चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन इकोसिस्‍टम एकीकृत स्वास्थ्य सेवा के विश्व स्तर पर विश्वसनीय मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है | यह आयुष जैसी पारंपरिक प्रणालियों के साथ आधुनिक चिकित्सा बुनियादी ढांचे को जोड़ती है यह उपचारात्मक और निवारक देखभाल दोनों को सक्षम बनाता है।

मजबूत सरकारी नीतिडिजिटल सुविधा और अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक इस वृद्धि का समर्थन करते हैं। वैश्विक पहुंच का विस्तार मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए एक व्यापक गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत कर रहा है।

जैसे-जैसे वैश्विक मांग बढ़ती हैभारत वैश्विक स्वास्थ्य सेवा और कल्याण यात्रा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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