इस बार कहानी पहले से ज्यादा परिपक्व है। फिल्म प्यार मिलने की नहीं, बल्कि प्यार को बचाए रखने की मुश्किलों पर बात करती है। यही वजह है कि इसकी कहानी आज के युवाओं और लंबे रिश्तों में रह रहे लोगों से जुड़ती हुई नजर आती है।
कास्ट- शाहिद कपूर, कृति सेनन, रश्मिका मंदाना डायरेक्टर- होमी अदजानिया ड्यूरेशन- 2 घंटे 30 मिनट रेटिंग- 3/5
फिल्म की कहानी:- कुणाल (शाहिद कपूर) और दिया (रश्मिका मंदाना) कई सालों से साथ हैं। दोनों का रिश्ता बाहर से स्थिर दिखता है, लेकिन भीतर कई अनकहे सवाल मौजूद हैं। शादी, करियर और भविष्य को लेकर दोनों की सोच अलग होने लगती है। इसी दौरान उनकी जिंदगी में एली (कृति सेनन) की एंट्री होती है। एली की मौजूदगी सिर्फ रिश्ते में हलचल नहीं लाती, बल्कि तीनों किरदारों को अपने फैसलों और भावनाओं का सामना करने पर मजबूर करती है। फिल्म की अच्छी बात यह है कि यह किसी एक किरदार को सही या गलत साबित करने की कोशिश नहीं करती। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और रिश्तों के उन पहलुओं को छूती है, जिनसे ज्यादातर लोग कभी न कभी गुजरते हैं।
स्टारकास्ट की एक्टिंग:- शाहिद कपूर ने कुणाल के किरदार को काफी सहजता से निभाया है। उनके हिस्से में ज्यादा शोर मचाने वाले सीन नहीं हैं, लेकिन इमोशनल सीन में वह असर छोड़ते हैं। रश्मिका मंदाना का काम भी अच्छा है। उन्होंने अपने किरदार की उलझनों और असमंजस को स्वाभाविक तरीके से पर्दे पर उतारा है।
कृति सेनन फिल्म की मजबूत कड़ी बनकर सामने आती हैं। उनका किरदार सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कहानी आगे बढ़ने के साथ कई परतें खोलता है। तीनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री फिल्म को विश्वसनीय बनाती है।
डायरेक्शन और तकनीकी:- होमी अदजानिया रिश्तों पर आधारित फिल्मों को हमेशा एक अलग विजुअल ट्रीटमेंट देते रहे हैं और यहां भी ऐसा ही देखने को मिलता है। फिल्म की रफ्तार ज्यादातर हिस्सों में संतुलित रहती है। संवाद बनावटी नहीं लगते और कई जगह सीधे दिल तक पहुंचते हैं। सिसिली की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म को आकर्षक बनाती हैं। सिनेमैटोग्राफी शानदार है और कई दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। कॉस्ट्यूम और प्रोडक्शन डिजाइन भी कहानी के माहौल को मजबूत बनाते हैं। हालांकि फिल्म का दूसरा भाग कुछ जगह थोड़ा लंबा महसूस होता है। कुछ भावनात्मक दृश्यों को छोटा रखा जाता तो प्रभाव और बेहतर हो सकता था। कुछ मोड़ ऐसे भी हैं जिनका अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है।
फिल्म का म्यूजिक:- प्रीतम का संगीत फिल्म के मूड के साथ चलता है। गाने कहानी पर हावी होने की बजाय उसका हिस्सा बनते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी भावनात्मक दृश्यों को बेहतर बनाता है। हालांकि एल्बम में ऐसा कोई गीत नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद लंबे समय तक साथ रहे, लेकिन कहानी के भीतर गानों का इस्तेमाल प्रभावी है।
फिल्म देखें या नहीं:- 'कॉकटेल 2' रिश्तों की जटिलताओं को समझने और महसूस करने वाली फिल्म है। यह बड़े दावे नहीं करती और न ही हर सवाल का आसान जवाब देती है। कुछ कमजोरियों के बावजूद मजबूत अभिनय, खूबसूरत विजुअल्स और भावनात्मक ईमानदारी इसे एक अच्छी वीकेंड वॉच बनाते हैं। अगर आपको रिश्तों पर आधारित फिल्में पसंद हैं तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

Comments
Post a Comment