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सीसीआई ने होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड द्वारा एस्टेमो लिमिटेड में 21 प्रतिशत वोटिंग इंटरेस्ट के अधिग्रहण को मंजूरी दी

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड द्वारा एस्टेमो लिमिटेड में 21 प्रतिशत वोटिंग इंटरेस्ट के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संयोजन होंडा मोटर कंपनी लिमिटेड (अधिग्रहणकर्ता) द्वारा हिताची लिमिटेड (विक्रेता) से एस्टेमो लिमिटेड (लक्ष्य) में 21 प्रतिशत वोटिंग इंटरेस्ट के अधिग्रहण से संबंधित है। अधिग्रहणकर्ता कंपनी होंडा गिकेन कोग्यो काबुशिकी काइशा के रूप में जापान के कंपनी अधिनियम के तहत निगमित एक सीमित देयता संयुक्त स्टॉक निगम है। यह होंडा समूह की प्रमुख कंपनी है। भारत में , यह मुख्य रूप से ( i) ऑटोमोबाइल , दोपहिया वाहन और बिजली उत्पादों के निर्माण और बिक्री , (ii) ऑटोमोबाइल और दोपहिया वाहनों के लिए ऑटोमोटिव कल-पुर्जो के निर्माण और बिक्री , और ( iii) अनुसंधान और विकास गतिविधियों में लगी हुई है। लक्षित कंपनी को 2009 में जापान के कानूनों के तहत निगमित किया गया था , 2021 में इसका विलय और एकीकरण हुआ और अब यह अधिग्रहणकर्ता , विक्रेता और जेआईसीसी -01 इन्वेस्टमेंट बिजनेस लिमिटेड पार्टनरशिप द्वारा संयुक्त रूप से नियंत्रित है। भारत में , लक्षित कंपनी मुख्य रूप ...

कार्बन उत्सर्जन में 45 % की कमी के साथ वीओ चिदंबरनार बंदरगाह हरित समुद्री विकास के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा: सरबानंदा सोनोवाल

With a 45% reduction in carbon emissions, V.O. Chidambaranar Port has emerged as a role model for green maritime development: Sarbananda Sonowal
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्‍ल्‍यू) सरबानंदा सोनोवाल ने कहा कि वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (वीओसीपीए) भारत में सतत समुद्री विकास के लिए एक मॉडल के रूप में उभरा है। उन्होंने बंदरगाह द्वारा कार्बन उत्सर्जन कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और हरित अवसंरचना विकास में की गई महत्वपूर्ण प्रगति का हवाला दिया।

वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण में सतत विकास, शिक्षा और नवाचार से जुड़ी कई पहलों को समर्पित करते हुए, सोनोवाल ने बंदरगाह की पहली सतत विकास रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला, जिसमें पता चला कि नवीकरणीय ऊर्जा अब बंदरगाह की ऊर्जा खपत के लगभग 94 प्रतिशत की भरपाई करती है, जबकि शुद्ध कार्बन उत्सर्जन में लगभग 45 प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में प्रति टन माल की कार्बन तीव्रता लगभग आधी हो गई है, जिससे भारत के हरित समुद्री परिवर्तन में वीओ चिदंबरनार बंदरगाह की अग्रणी स्थिति और मजबूत हुई है।

सरबानंदा सोनोवाल ने कहा कि वीओ चिदंबरनार बंदरगाह यह प्रदर्शित कर रहा है कि जब अवसंरचना विकास को स्थिरता, नवाचार और सामुदायिक कल्याण द्वारा निर्देशित किया जाता है तो क्या हासिल किया जा सकता है। बंदरगाह द्वारा शुद्ध कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कमी लाना भारत के हरित और अधिक जिम्मेदार समुद्री विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये पहलें प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार अवसंरचना के निर्माण के साथ-साथ लोगों, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण में निवेश करने के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण केंद्रीय विद्यालय, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह में वर्ष 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए शैक्षणिक गतिविधियों का प्रारंभ था। केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्वीकृति से स्थापित यह संस्थान प्रारंभ में बंदरगाह स्कूल परिसर से संचालित होगा और बंदरगाह कर्मचारियों, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सीबीएसई शिक्षा प्रदान करेगा। इस पहल से तूतीकोरिन में शैक्षिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुंच का विस्तार होने की उम्मीद है।

सोनोवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक परिवर्तन के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है। वीओ चिदंबरनार बंदरगाह में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से बच्चों को नए अवसर मिलेंगे और दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने आईआईएम कलकत्ता की केस स्टडी, "द हाइड्रोजन पिवट: ऑर्केस्ट्रेटिंग द ग्रीन ट्रांजिशन एट वीओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी" का भी विमोचन किया, जो बंदरगाह के एक पारंपरिक कार्गो हब से हरित ऊर्जा और सतत समुद्री केंद्र में परिवर्तन का दस्तावेजीकरण करती है। यह अध्ययन नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युतीकरण और हरित हाइड्रोजन विकास में बंदरगाह के अग्रणी प्रयासों पर प्रकाश डालता है, जिसमें भारत की पहली हरित हाइड्रोजन पायलट परियोजना भी शामिल है जिसे एक प्रमुख बंदरगाह पर शुरू किया गया है।

पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह को स्कोप-2 उत्सर्जन मुक्त बंदरगाह के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है, जो स्वच्छ ऊर्जा और कम कार्बन उत्सर्जन वाले संचालन की दिशा में इसके सफल परिवर्तन को दर्शाता है। यह प्रमाणन बंदरगाह के कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को प्रमाणित करता है और भारत के अग्रणी हरित बंदरगाहों में से एक के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण ने वडोदरा स्थित गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ अनुसंधान, नवाचार, लॉजिस्टिक्स शिक्षा, कौशल विकास और सतत बंदरगाह संचालन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी से समुद्री लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह प्रबंधन में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना में सहायता मिलने के साथ-साथ उद्योग और शिक्षा जगत के बीच नए सहयोग के अवसर भी उत्पन्न होने की उम्मीद है।

श्री सोनोवाल ने पोर्टजीपीटी मोबाइल एप्लिकेशन भी शुभारंभ किया, जिससे वीओ चिदंबरनार बंदरगाह भारत का पहला प्रमुख बंदरगाह बन गया जिसने एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एंटरप्राइज-ग्रेड जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म का विस्तार किया है। उम्मीद है कि यह प्लेटफॉर्म परिचालन दक्षता, ज्ञान प्रबंधन और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सुधार करेगा और बंदरगाह के दीर्घकालिक डिजिटल परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा।

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष सुसंता कुमार पुरोहित और मंत्रालय एवं सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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