Skip to main content

वैश्विक स्तर पर रसोई गैस की कीमत भारत में सबसे कम

भारतीय परिवार आज भी किसी भी पड़ोसी देश के परिवार की तुलना में रसोई गैस(एलपीजी) कहीं सस्ती कीमत पर खरीद रहे हैं, और यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की कीमतों से काफी कम है।  प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना(पीएमयूवाई) के एक लाभार्थी को 14.2-किलोग्राम के एक सिलेंडर के लिए प्रभावी रूप से ₹642 का भुगतान करना पड़ता है, जबकि दिल्ली में एक सामान्य उपभोक्ता ₹942 का चुकाता है। इसके विपरीत, वहीं, एक सिलेंडर की आपूर्ति लागत  बढ़कर अब ₹1,600 से अधिक हो गई है। मार्केट (बाजार)  14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत (₹) उज्ज्वला उपभोक्ता कम भुगतान करता है भारत (उज्ज्वला, संशोधन के बाद प्रभावी) 642 ----------- पाकिस्तान 1,046 लगभग 39 प्रतिशत         नेपाल 1,207 लगभग 47 प्रतिशत बांग्लादेश लगभग. 1,225 लगभग 48 प्रतिशत         श्रीलंका 1,241 लगभग 48 प्रतिशत अमेरिका लगभग. 1,755 लगभग 63 प्रतिशत A        ऑस्ट्रलिया लगभग. 1,765 लगभग 64 प्रतिशत कनाडा लगभग. 2,411 लगभग 7...

गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार, 9 जून 2026 को नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का शुभारंभ करेंगे

गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार, 9 जून 2026 को नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का शुभारंभ करेंगे
भारत के सीमा प्रबंधन के डिजिटल रूपांतरण में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह मंगलवार, 9 जून 2026 को नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (एलपीएमएस) का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह पहल स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट के प्रति मोदी सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीकी समाधानों के माध्यम से सीमा पार व्यापार और यात्रियों की आवाजाही को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

इस अवसर पर, केंद्रीय गृह मंत्री डॉकी और श्रीमंतपुर भूमि बंदरगाहों पर नवनिर्मित हितधारक आवास सुविधाओं का भी उद्घाटन करेंगे, जिससे सीमा सुरक्षा कर्मियों और अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों के लिए बुनियादी ढांचागत सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा।

एलपीएमएस का शुभारंभ भारत की आधुनिक और तकनीक-सक्षम स्मार्ट बॉर्डर मैनेजमेंट प्रणाली की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। यह व्यापार सुगमता, कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने की राष्ट्र की रणनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एलपीएमएस एक अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे सभी भूमि बंदरगाहों के परिचालन को एक एकीकृत प्रणाली में संयोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह लॉजिस्टिक्स और रेगुलेटरी सूचनाओं के सुरक्षित और रियल-टाइम में आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है, जिससे भूमि बंदरगाहों को हवाई अड्डों और समुद्री बंदरगाहों पर संचालित डिजिटल प्रणालियों के समकक्ष लाया जा सकेगा। एक न्यूट्रल और ओपन प्लेटफॉर्म के रूप में, एलपीएमएस सरकारी एजेंसियों और निजी ऑपरेटरों सहित विभिन्न हितधारकों के बीच निर्बाध समन्वय को सुविधाजनक बनाएगा, जिससे विलंब में कमी आएगी और परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी।

यह प्रणाली कार्गो और यात्रियों की प्रोसेसिंग के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो प्रदान करती है, जिसमें स्लॉट बुकिंग, भुगतान, ट्रैकिंग और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। आइसगेट (ICEGATE), यूएलआईपी (ULIP) और मोटर व्हीकल इकोसिस्टम जैसे प्रमुख राष्ट्रीय प्लेटफॉर्मों के साथ पूर्णतः एकीकृत एलपीएमएस एक इंटरऑपरेबल, कुशल और पारदर्शी सीमा प्रबंधन को सक्षम बनाएगा।

भारतीय भूमि पत्तन प्राधिकरण (एलपीएआई), गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, जो व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए भूमि बंदरगाहों के विकास और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है। वर्तमान में, एलपीएआई भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर 15 भूमि बंदरगाहों का संचालन करती है: भारत-पाकिस्तान सीमा पर अटारी (पंजाब) और डेरा बाबा नानक (पंजाब); भारत-नेपाल सीमा पर रुपइडिहा (उत्तर प्रदेश), रक्सौल (बिहार) और जोगबनी (बिहार); भारत-भूटान सीमा पर दर्रांग (असम); भारत-बांग्लादेश सीमा पर पेट्रापोल (पश्चिम बंगाल), डॉकी (मेघालय), सुतारकंडी, गोलकगंज और मनकाचर (असम), अगरतला, श्रीमंतपुर और सबरूम (त्रिपुरा); तथा भारत-म्यांमार सीमा पर मोरेह (मणिपुर)।

वर्ष 2014-15 के बाद से, भूमि बंदरगाहों के माध्यम से होने वाला आयात-निर्यात (EXIM) व्यापार लगभग ₹5,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹82,800 करोड़ हो गया है, जो 2025-26 में ₹73,300 करोड़ रहा। कार्गो वाहनों की संख्या 1.1 लाख से बढ़कर 2024-25 में 6.69 लाख (2025-26 में 6.63 लाख) हो गई है, जबकि क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद यात्रियों की आवाजाही 1.7 लाख से बढ़कर 2024-25 में 25.8 लाख हो गई, जो 2025-26 में 11.90 लाख दर्ज की गई।

Comments