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फिल्म रिव्यू -‘है जवानी तो इश्क होना है’

डेविड धवन की फिल्मों को देखने जाते वक्त दर्शक लॉजिक नहीं, हंसी ढूंढते हैं। गलतफहमियां, रिश्तों का गड़बड़झाला, भागदौड़ और ढेर सारी अफरा तफरी उनकी फिल्मों की पहचान रही है। है जवानी तो इश्क होना है भी उसी स्कूल की फिल्म है।  यहां कहानी से ज्यादा जोर उन हालातों पर है जो धीरे-धीरे इतने बेतुके हो जाते हैं कि दर्शक या तो हंसता है या फिर सिर पकड़कर बैठ जातें  हैं। फिल्म में मनोरंजन के कुछ अच्छे पल जरूर हैं, लेकिन उन्हें पाने के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। फिल्म की कहानी: जस एक खुशमिजाज लेकिन बेहद जोशीला इंसान है। उसकी पत्नी बानी उससे प्यार तो करती है, लेकिन उसकी जरूरतों और सोच के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती। जस पिता बनना चाहता है, जबकि बानी उसकी इस जल्दबाजी और लगातार बढ़ते दबाव से परेशान हो चुकी है। बात इतनी बिगड़ जाती है कि वह जस से तलाक लेने का फैसला कर लेती है। टूटे हुए रिश्ते से बाहर निकलने की कोशिश में जस की जिंदगी में प्रीत की एंट्री होती है। दोनों करीब आते हैं और जस को लगता है कि जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही है, लेकिन डेविड धवन की फिल्म में चीजें इतनी आसान कहां होती हैं। अस...

भाजपा छोड़ते ही अन्नामलाई ने बनाई नई पार्टी

भाजपा छोड़ते ही अन्नामलाई ने बनाई नई पार्टी
तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने शुक्रवार को नई पार्टी बनाने का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज में अन्नामलाई ने कहा कि आज हम एक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। हमारी राजनीतिक पार्टी तमिलनाडु में 2031 में अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

मेरे लिए यह तय करना बहुत मुश्किल था कि मैं बीजेपी का सदस्य रहूं या तमिल लोगों से जुड़ा रहूं। मैंने 4 दिसंबर 2025 को पार्टी को बताया कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं। पार्टी ने मुझसे कहा कि पहले चुनाव पूरे कर लूं और फिर जाऊं।

अन्नामलाई ने 2 जून को भाजपा से इस्तीफा दिया था। लेटर शुक्रवार को सामने आया। उन्होंने इस्तीफे की वजह बताते हुए लिखा कि पिछले 18 महीनों से आलाकमान के साथ उनके मतभेद चल रहे हैं। अब उनके विचार एक जैसे नहीं रहे।

अन्नामलाई पिछले 6 सालों से भाजपा से जुड़े थे। उनके रहते हुए बीजेपी ने 2021 और 2026 विधानसभा चुनाव लड़ा। दोनों ही चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 2% से ज्यादा नहीं बढ़ सका।

अन्नामलाई के इस्तीफा की 3 बड़ी बातें…

1. मोदी से प्रभावित होकर भाजपा में आया था- पीएम मोदी जी के नेतृत्व से प्रेरित होकर मैं 6 साल पहले भाजपा में शामिल हुआ था। मेरा मकसद तमिलनाडु में बदलाव लाना और राज्य में राजनीति के तौर-तरीकों को बेहतर बनाना था।

2. बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन टिकी नहीं- मैं बीजेपी नेतृत्व का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझ जैसे युवा और अनुभवहीन व्यक्ति पर भरोसा करके बड़ी जिम्मेदारियां और नेतृत्व के पद सौंपे। राज्य की जनता कई दशकों से चली आ रही आम राजनीतिक चर्चाओं से ऊब चुकी थी और बदलाव चाहती थी। पिछले दशक में कई बार बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन वे टिक नहीं पाईं।

3. भाजपा की टॉप लीडरशिप के साथ मतभेद- पिछले 18 महीनों में टॉप लीडरशिप के साथ कुछ मतभेद रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तरीके को लेकर उनके और पार्टी नेतृत्व के विचार अब मेल नहीं खाते।

भाजपा को कितना नुकसान:- राज्य में युवाओं की पकड़ कमजोर होना: अन्नामलाई ने खुद को युवा, आक्रामक और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में स्थापित किया। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। युवाओं में भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है।

तमिलनाडु में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा खोना: पिछले 4-5 साल में अन्नामलाई ही राज्य में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे। उनके बाद वैसी लोकप्रियता वाला दूसरा नेता फिलहाल नहीं दिख रहा है।

DMK विरोधी वोटों का बिखराव: अन्नामलाई DMK के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं। उनके हटने से विपक्षी राजनीति में भाजपा की धार कुछ कमजोर पड़ सकती है।

नुकसान सीमित भी रह सकता है-

भाजपा का वोट पूरी तरह अन्नामलाई पर निर्भर नहीं: तमिलनाडु में भाजपा का एक हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आधार पर वोट करता है।

NDA गठबंधन सहारा दे सकता है: AIADMK जैसे सहयोगी दल साथ रहे तो भाजपा का संगठनात्मक नुकसान कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।

अन्नामलाई ने 2020 में भाजपा जॉइन की, 6 साल बाद इस्तीफा: अन्नामलाई ने 25 अगस्त 2020 को BJP जॉइन की थी। उस समय वे कर्नाटक कैडर के पूर्व IPS अधिकारी थे। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद तमिलनाडु BJP का उपाध्यक्ष बनाया गया था।

2021 को उन्हें तमिलनाडु BJP का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अप्रैल 2025 तक इस पद पर रहे। तमिलनाडु में BJP के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया।

एन मन्न, एन मक्कल (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा निकाली, जिसके जरिए राज्यभर में जनसंपर्क किया। 2021 विधानसभा चुनाव में अरवाकुरिची सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

DMK सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लगातार उठाया। 2024 लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

तमिलनाडु में BJP को सिर्फ 1 सीट मिली :- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में BJP सिर्फ 1 सीट जीत पाई, जबकि एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीटें मिलीं। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है।


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