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भारतीय तटरक्षक बल के लिए मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत के निर्माण का मुंबई में औपचारिक शुभारंभ

भारतीय तटरक्षक बल के लिए मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा बनाए जा रहे अगली पीढ़ी के छह अपतटीय गश्ती पोतों के चौथे पोत के निर्माण का औपचारिक शुभारंभ समारोह आज मुंबई में आयोजित हुआ।  आधुनिक मशीनरी और अत्याधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित यह पोत , सरकार की आत्मनिर्भर भारत दृष्टियोजना के अनुरूप , मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन , विकसित और निर्मित किया जा रहा है। समारोह में भारतीय तटरक्षक और मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। अगली पीढ़ी के इन छह अपतटीय गश्ती पोतों के निर्माण संबंधी अनुबंध  का काम 20 दिसंबर , 2023 को पूरा हुआ था।  भारतीय तटरक्षक द्वारा अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा मजबूत बनाने के निरंतर प्रयासों की यह उल्लेखनीय पहल है , जो राष्ट्र की रणनीतिक स्वायत्तता सबलता प्रदान करता है।

भारत-ओमान सीईपीए समझौते के बाद एपीडा ने वाराणसी से ओमान को बिस्कुट के पहले निर्यात शिपमेंट की सुविधा दी

Following the India-Oman CEPA agreement, APEDA facilitated the first export shipment of biscuits from Varanasi to Oman
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से ओमान को 40 मीट्रिक टन बिस्कुट की खेप के निर्यात में की सुविधा प्रदान की। 

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर के बाद वाराणसी से ओमान को बिस्कुट की यह पहली निर्यात खेप है, जो इस क्षेत्र से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की बढ़ती निर्यात क्षमता को प्रतिबिंबित करती है।

यह निर्यात खेप वाराणसी स्थित निर्माता-निर्यातक श्री तिरुपति बालाजी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से भेजी गई है। यह पहल क्षेत्र के प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने और उत्तर प्रदेश के मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एपीडा कई निर्यात प्रोत्साहन पहलों के जरिए निर्यातकों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है, जिसमें आहार 2026 और गलफूड 2026 जैसे प्रमुख घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेना शामिल है। इन प्रयासों से वाराणसी क्षेत्र में निर्मित उत्पादों की विजिबिलिटी बढ़ाने और विदेशी बाजारों तक पहुंच को सरल बनाने में मदद मिली है।

यह खेप वाराणसी से अपनी यात्रा शुरू करेगी और सीमा शुल्क निकासी के लिए कानपुर स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) जाएगी, जिसके बाद इसे आगे ओमान भेजने के लिए जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) ले जाया जाएगा।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के फ्रेमवर्क के अंतर्गत भारत और ओमान के बीच मजबूत होते व्यापार और आर्थिक संबंधों के मद्देनजर निर्यात का महत्व और भी बढ़ जाता है। उम्मीद है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्रों में, के लिए अधिक बाजार पहुंच को सरल बनाएगा और नए अवसर लाएगा।

एपीडा ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में ओमान के बाजार में अतिरिक्त खेप भेजने की योजना है, जो इस क्षेत्र से प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग और बाजार के मौकों को प्रतिबिंबित करती है।

भारत-ओमान सीईपीए पर हस्ताक्षर के बाद वाराणसी से ओमान को बिस्कुट का पहला निर्यात, क्षेत्र के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है और देश भर में उभरते कृषि-निर्यात केंद्रों से निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करता है।

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