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भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों की क्षमता के साथ सतत रेल परिवहन को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है

भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए तैयार है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों को चलाने के तरीके में हुए विकास का एक नया अध्याय है, जो कोयले और भाप से स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत की व्यापक यात्रा को दर्शाता है। पिछले 12 वर्षों में तीव्र विद्युतीकरण ने आयातित डीजल पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे स्वच्छ रेल परिवहन में अगली प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। आज, 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉड गेज मार्गों के विद्युतीकरण के साथ, भारतीय रेलवे इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ रहा है। ओवरहेड लाइनों से बिजली लेने वाली पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनसेट हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से ट्रेन के अंदर ही बिजली उत्पन्न करती है, जिसमें जल वाष्प एकमात्र उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है। एक तरह से देखा जाए तो, यह ट्रेन एक बार फिर से अपने ऊर्जा स्रो...

विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों के परामर्श के लिए कॉर्पोरेट औसत ईंधन अर्थव्यवस्था 2027 मानदंड (सीएएफई–III) का मसौदा जारी किया

The Ministry of Power has released the draft Corporate Average Fuel Economy (CAFE-III) norms for 2027 for stakeholder consultation
विद्युत मंत्रालय ने आज हितधारकों के परामर्श के लिए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड (सीएएफई-III) का मसौदा जारी किया। ये मानदंड 2027-28 से 2031-32 के दौरान भारत में बिक्री के लिए विनिर्मित या आयातित एम1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू करने का प्रस्ताव है।

मंत्रालय ने इन मसौदा मानदंडों के संबंध में हितधारकों और आम जनता से सुझाव तथा प्रतिक्रिया मांगी है। इन्हें ऊर्जा संरक्षण उप सचिव, कमरा संख्या-6424, हॉल संख्या-4, छठी मंजिल, जीपीओए-3, अफ्रीका एवेन्यू, नेताजी नगर, नई दिल्ली को संबोधित करके भेजा जा सकता है या saket-upsc[at]gov[dot]in पर ईमेल किया जा सकता है। सुझाव और प्रतिक्रिया प्राप्त करने की अंतिम तिथि 6 अगस्त, 2026 है। मसौदा मानदंड शीघ्र ही विद्युत मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की वेबसाइटों पर भी अपलोड किए जाएंगे।

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