केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान योजना के अगले चरण पर आज एक कार्यशाला आयोजित की। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यशाला में देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क की भविष्य योजना पर विचार-विमर्श के लिए विमानन क्षेत्र के प्रमुख हितधारक एकत्रित हुए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 4 जुलाई, 2026 को जोधपुर हवाई अड्डे से 'संशोधित उड़ान' योजना का शुभारंभ किया था।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल, नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष विपिन कुमार की उपस्थिति में कार्यशाला का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उड़ान योजना पर डिजिटल प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ, जिसमें देश भर में क्षेत्रीय हवाई संपर्क बेहतर बनाने में इस योजना की उपलब्धियों और परिवर्तनकारी प्रभाव प्रदर्शित किए गए। उद्घाटन सत्र के दौरान उड़ान योजना की सफलता दर्शाने वाली एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।
श्री के. राममोहन नायडू ने अपने संबोधन में, उड़ान परियोजना के अगले चरण की जानकारी दी और क्षेत्रीय हवाई संपर्क के विस्तार, संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने और विमानन का लाभ देश के हर कोने तक पहुंचाने के सरकार के दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की।
श्री नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2001 में भारत में 65 हवाई अड्डे थे, जिनकी संख्या 2014 तक बढ़कर 74 हो गई – यानी 13 वर्षों में 9 हवाई अड्डे और जुड़ गए। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में 55 अप्रयुक्त और अनुपयोगी हवाई पट्टियों को पुनर्संचालित कर और उन्हें परिचालन योग्य हवाई अड्डों में परिवर्तित 90 हवाई अड्डे और जोड़े गए हैं और यह संख्या 9 से 90 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि भारत के तीसरे सबसे बड़े घरेलू नागरिक उड्डयन बाजार बनने के साथ यह परिवर्तनकारी विकास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी उड़ान योजना के कारण ही संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले, हवाई यातायात मुख्यतः शीर्ष छह हवाई अड्डों पर केंद्रित था, जिससे द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में हवाई सेवा कम या अनुपलब्ध थी। लेकिन तभी प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में घोषित राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति 2016 ने हमारे नागरिक उड्डयन परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया।
श्री नायडू ने उड़ान योजना के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के परिवर्तनकारी नेतृत्व में देश में विमानन के प्रति लोगों की सोच पूर्णतया बदल गई है और आम आदमी की मानसिकता में बदलाव आया है। जहां 10-20 साल पहले लोग हवाई जहाज की एक झलक पाने के लिए हवाई अड्डे की चारदीवारी के बाहर खड़े रहते थे, वहीं आज की पीढ़ी के स्मरण में वह सब नहीं है। प्रधानमंत्री के हवाई चप्पल से हवाई जहाज के सपने के साकार होने से मध्यम वर्ग और नवमध्यम वर्ग के आम लोग बड़े आत्मविश्वास से हवाई अड्डों में प्रवेश कर रहे हैं और देश के सुदूरतम हिस्सों तक उड़ान भर रहे हैं। नागर विमानन मंत्री ने कहा कि हवाई अड्डों पर उड़ान यात्री कैफे भी शुरू किया गया है, जहां यात्री 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में स्नैक्स जैसे किफायती जलपान का आनंद ले सकते हैं।
भारत के विमानन क्षेत्र की मजबूती का उल्लेख करते हुए श्री राममोहन नायडू ने कहा कि जब दुनिया भू-राजनीतिक तनावों से गुजर रही थी, तब भी हमने प्रतिदिन लगभग पांच लाख घरेलू यात्रियों को सेवाएं प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि इस वर्ष मई महीने में ही भारत में अब तक का सबसे अधिक मासिक घरेलू हवाई यातायात दर्ज हुआ, जिसमें 1.5 करोड़ से अधिक यात्रियों ने हवाई यात्रा की।
उड़ान योजना की सफलता की कहानियां साझा करते हुए श्री नायडू ने कहा कि पहले दरभंगा के लोगों को फ्लाइट पकड़ने के लिए 150 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती थी, पर आज दरभंगा की शाही लीची दुबई जैसे वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही है। ऐसी ही कहानी किशनगढ़ की भी है। वहां 2017 में हवाई अड्डा बनने से पहले संगमरमर उद्योग ठप्प पड़ा हुआ था। लेकिन अब निर्यात के लिए वहां से सीधा संपर्क स्थापित हो गया है। साथ ही प्रतिवर्ष 2 करोड़ तीर्थयात्री पुष्कर मंदिर और अजमेर दरगाह पहुंच रहे हैं। उड़ान योजना की इसी तरह की सफलता की कहानी केशोद, देवगढ़, झारसुगुड़ा, नांदेड़ की भी है।"
इस अवसर पर नागर विमानन मंत्री ने मंत्री ने हितधारकों को एक प्रस्तुति भी दी और संशोधित उड़ान योजना के प्रावधानों के बारे में बताया। इसमें उन्होंने मौजूदा योजना के साथ संशोधित उड़ान योजना की तुलनात्मक समीक्षा भी की।
नागर विमानन मंत्री द्वारा उल्लेखित नए प्रावधान नीचे की तालिका में दर्शाए गये हैं।
योजना प्रावधान | मौजूदा उड़ान योजना | संशोधित उड़ान योजना |
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तीसरे वर्ष में – 75 प्रतिशत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण सहायता वर्ष 4 – स्वीकृत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण का 50 प्रतिशत वर्ष 5 – स्वीकृत व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण का 25 प्रतिशत |
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आधुनिक हेलीपैड की कीमत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड के हिसाब से, 200 हेलीपैड विकसित करने के लिए 3,661 करोड़ रुपये (मुद्रास्फीति समायोजित) की आवश्यकता |
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इसे सेवा प्रदान की गई माना जाएगा।
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नागर विमानन राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहोल ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में देश भर के लोगों, विशेष रूप से द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी और दूरस्थ स्थानों में रहने वाले लोगों के लिए हवाई यात्रा किफायती और सुलभ बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
कार्यशाला में संशोधित उड़ान योजना का मसौदा जारी किया गया, जिसमें योजना के अगले चरण के दृष्टिकोण, उद्देश्य और कार्यान्वयन रूपरेखा दी गई है। यह मसौदा क्षेत्रीय हवाई संपर्क सुदृढ़ बनाने, हवाई अड्डों के बेहतर बुनियादी ढांचे और विमानन क्षेत्र में विकास के नए अवसर खोलने की दूरदर्शी कार्य योजना है।
कार्यशाला में एयरलाइंस, हवाई अड्डा संचालकों, राज्य सरकारों, उद्योग जगत हितधारकों और विमानन क्षेत्र के अन्य भागीदारों और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें कार्यान्वयन रणनीतियां, बुनियादी ढांचे की तैयारी, हितधारकों के बीच तालमेल और क्षेत्रीय विमानन अवसर मजबूत करने पर चर्चा की गई।
उड़ान योजना ने आरंभ से ही, हवाई यात्रा सुलभ बनाने, कम सेवा वाले और सेवा विहीन क्षेत्रों को जोड़ने, पर्यटन को बढ़ावा देने, व्यापार सुगम बनाने और रोजगार के अवसर उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना के अगले चरण का उद्देश्य इन उपलब्धियों को आगे बढ़ाना और भारत के विमानन क्षेत्र के विकास को और गति प्रदान करना है।

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