एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से सुपरअलॉय द्वि-धात्विक संरचनाओं में हुई प्रगति से सुपरअलॉय के आयात में कमी संभव
लेजर-आधारित पाउडर बेड फ्यूजन (पीबीएफ-एलबी/एम) एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग नामक तकनीक का उपयोग करके अनुसंधानकर्ताओं द्वारा विकसित एक दरार-मुक्त द्वि-धात्विक संरचना, महंगी सुपरअलॉय के समग्र इस्तेमाल को कम करने में मदद कर सकती है। इससे इनके आयात पर निर्भरता कम होगी।
स्टेनलेस स्टील और निकल आधारित सुपर मिश्रधातुओं का व्यापक रूप से एयरोस्पेस, परमाणु और थर्मल पावर प्लांटों में इस्तेमाल किया जाता है। गैस टरबाइन के कुछ क्षेत्रों में तापमान 2000° सेंटीग्रेड तक पहुंच सकता है, जबकि आस-पास के हिस्से प्रक्रिया की विभिन्न स्थितियों के दौरान कम तापमान के संपर्क में रहते हैं। इसलिए, स्टेनलेस स्टील को निकल आधारित सुपरमिश्रधातुओं के साथ एक ही घटक में संयोजित करना तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, स्टेनलेस स्टील (एसएस316एल) और इनकोनेल सुपरएलॉय (आईएन718) की रासायनिक संरचना, गलनांक और तापीय विस्तार गुणांक में अंतर के कारण पारंपरिक वेल्डिंग चुनौतीपूर्ण है। इन अंतरों के कारण अक्सर ठोस स्वरूप प्रदान करने के दौरान दरारें, छिद्रयुक्तता, एनबी/एमओ-समृद्ध चरणों का पृथक्करण और भंगुर अंतर्धात्विकों का निर्माण होता है। हालांकि भिन्न धातुओं को जोड़ना असामान्य नहीं है, फिर भी पाउडर बेड फ्यूजन का इस्तेमाल करके दरार-मुक्त, संरचनात्मक रूप से श्रेणीबद्ध और यांत्रिक रूप से मजबूत इंटरफेस प्राप्त करना और इंटरफेस पर तन्यता परीक्षण करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्त संस्थान, हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई) द्वारा किया गया अनुसंधान इस कमी को दूर करता है।
लेजर आधारित पाउडर बेड फ्यूजन सिस्टम का उपयोग करके एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से द्विधात्विक संरचना एसएस316एल का निर्माण किया गया। इसे सतह-ग्राउंड आईएन718 प्लेट पर सीधे बनाया गया, जिसमें इंटरफेस पर कोई स्पष्ट दरार या छिद्र नहीं दिखाई दिए। इस सामग्री ने इंटरफेस पर विफलता द्विधात्विक जंक्शन से भिन्न, नरम एसएस316एल पर हुई लगभग 310 एचवी की अधिकतम कठोरता और 550 ± 30 एमपीए की अंतिम तन्यता शक्ति (यूटीएस) दर्शायी, जो बेहतर इंटरफेशियल एकरूपता को दर्शाता है।
एस. नारायणस्वामी , गुरुराज तेलासांग , नोक्यून पार्क और रवि बाथे की टीम द्वारा किए गए इस विकास को प्रोग्रेस इन एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है । यह तकनीक चुनौतीपूर्ण औद्योगिक वातावरण के लिए बहु-सामग्री घटकों के निर्माण को सक्षम बनाती है। संभावित अनुप्रयोगों में बॉयलर ट्यूब, परमाणु और अत्यधिक-अतिक्रिटिकल (यूएससी) कोयला-आधारित विद्युत संयंत्रों के लिए हीट एक्सचेंजर और उन्नत ऊर्जा प्रणालियां शामिल हैं, जहां किसी घटक के विभिन्न भाग अलग-अलग तापमान और तनाव स्थितियों का सामना करते हैं। यह तकनीक परमाणु रिएक्टरों और तेल एवं गैस प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी प्रासंगिक है, जहां संक्षारण प्रतिरोध और उच्च तापमान पर मजबूती दोनों की एक साथ आवश्यकता होती है।
एयरोस्पेस क्षेत्र में, एक द्वि-धात्विक संरचना का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें स्टील वाला भाग भार वहन करने वाले घटक के रूप में कार्य करता है, जबकि इनकॉनेल वाला भाग उच्च तापमान प्रतिरोध प्रदान करता है। एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग आंतरिक संरचनाओं के लिए भी नए रास्ते खोलता है, जिससे सुपरअलॉय को केवल अत्यधिक तापीय जोखिम वाले क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से स्थापित करना संभव हो जाता है और घटक के प्रदर्शन में सुधार होता है।

Comments
Post a Comment