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राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग ने संबद्ध स्वास्थ्य शिक्षा बेहतर बनाने के लिए मेडिकल लेबोरेटरी तकनीक में डिप्लोमा योग्यता पाठ्यक्रम जारी किया

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) ने देश में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा की गुणवत्ता, एकरूपता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, 1 जुलाई, 2026 को जारी अधिसूचना द्वारा डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी – डीएमएलटी के लिए योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम पेश किया है। अभी डीएमएलटी संचालित कर रहे या आगे इसे चलाने वाले सभी संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से नए घोषित पाठ्यक्रम लागू करने की सलाह दी गई है, जबकि शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। दो वर्षीय डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान विषयों के साथ विज्ञान संवर्ग में बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की हुई है। यह पाठ्यक्रम पारंपरिक ज्ञान-आधारित शिक्षण से विस्तारित होकर योग्यता-आधारित शिक्षा प्रदान करने के अहम बदलाव को दर्शाता है। इसमें उन्नत नैदानिक ​​प्रयोगशाला सेवा प्रदान करने के लिए आवश्...

प्रधानमंत्री मोदी ने चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र का उद्घाटन किया

Prime Minister Modi inaugurated the state-of-the-art Mother and Child Centre and the state-of-the-art Neuroscience Centre at PGIMER, Chandigarh
प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज चंडीगढ़ स्थित स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र तथा अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंसेज़) केन्‍द्र का उद्घाटन किया। 

इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) के अंतर्गत पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में 150 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला भी रखी। इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल एवं केन्‍द्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया, केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा, केन्‍द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव तथा चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद श्री मनीष तिवारी भी उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीजीआईएमईआर में अत्‍याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उद्घाटन और नई परियोजनाओं की आधारशिला लाखों लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने वर्ष 2015 में पीजीआईएमईआर के दीक्षांत समारोह में अपनी यात्रा को याद करते हुए पिछले एक दशक में संस्थान की क्षमता में हुए उल्लेखनीय विस्तार की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पीजीआईएमईआर के प्रबंधन, विभाग के सदस्यों तथा युवा चिकित्सकों को उनकी समर्पित सेवाओं के लिए बधाई दी।

स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के बीच घनिष्ठ संबंध पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वच्छता को जन अभियान बनाने के उद्देश्य से ‘स्वच्छ भारत मिशन’ प्रारंभ किया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों शौचालयों के निर्माण, खुले में शौच से मुक्ति, देशव्यापी स्वच्छता अभियानों तथा स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयासों से जनस्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ की रैंकिंग ने चंडीगढ़ सहित अनेक शहरों को अपने स्वच्छता मानकों में निरंतर सुधार करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी श्री इंदरजीत सिंह सिद्धू की ‘ब्रूम वॉरियर’ पहल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि स्वच्छता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सरकार ने इस वर्ष उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।

जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, स्वच्छता एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। उन्होंने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल के अंतर्गत आयोजित विशेष स्वच्छता अभियान की सराहना की तथा चंडीगढ़ के नागरिकों को उनके उत्साहपूर्ण सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जन-अभियान बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले बारह वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक और परिवर्तनकारी बदलाव आए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया में उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत सहायता मांगने वाला देश नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों की सहायता करने वाला राष्ट्र बनकर उभरा। उन्होंने कहा कि आज भारत चिकित्सा पर्यटन (मेडिकल टूरिज्म) के प्रमुख वैश्विक केन्‍द्रों में से एक बन चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा, बारह वर्ष पहले हमने यह संकल्प लिया था कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी नागरिक को कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा प्रत्येक व्यक्ति को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियाँ इसी संकल्प का परिणाम हैं।

स्वास्थ्य अवसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, वर्ष 2014 के बाद देश में 15 नए एम्स को मंजूरी दी गई, सैकड़ों नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए तथा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए विशेष अस्पतालों को समर्थ बनाया गया है। उन्होंने वर्ष 2022 में शुरू हुए चंडीगढ़ स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान आज हजारों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने को भी समान प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के अंतर्गत देशभर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक, एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्रामीण, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों सहित पूरे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने वाले 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर काम कर रहे हैं, जिनमें 12 प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य देखभल सेवा पैकेज शामिल हैं। इन केन्‍द्रों के माध्यम से करोड़ों नागरिकों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों की जांच की जा चुकी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श तक लोगों की पहुँच को नई दिशा दी है। उन्होंने बताया कि अब तक इस मंच के माध्यम से 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सलाह आसानी से उपलब्ध हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि देश में अब 90 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी संस्थागत स्तर पर हो रही हैं। साथ ही, मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी आई है तथा शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के विशेष बल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग, एचपीवी टीकाकरण तथा यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी पहलें समय पर निवारक हस्तक्षेप सुनिश्चित कर करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही हैं।

क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को जनभागीदारी के साथ लागू किया जा रहा है, ताकि जागरूकता बढ़े, समय पर जांच हो तथा मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने बताया कि देश में टीबी उपचार का कवरेज अब 90 प्रतिशत से अधिक हो चुका है तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में टीबी की घटनाओं में पिछले एक दशक में 21 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सबसे अधिक लाभ गरीबों, मध्यम वर्ग तथा महिलाओं को मिला है, जो अक्‍सर अपने परिवार की देखभाल में स्वयं के स्वास्थ्य की उपेक्षा कर देती हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, भारत में स्वास्थ्य सेवा अब कोई विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि यह प्रत्येक सामान्य नागरिक का अधिकार बनती जा रही है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय सीमित मेडिकल कॉलेजों और सीटों के कारण अनेक प्रतिभाशाली युवाओं के लिए डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाता था। उन्होंने बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है तथा एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा की सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में एमबीबीएस कॉलेज की स्थापना को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है और शीघ्र ही इसमें प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अध्ययन का अवसर मिलेगा तथा भारत की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कार्यबल और अधिक सशक्त होंगे।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तनकारी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 ने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, पुनर्वासात्मक तथा उपशामक (पैलिएटिव) देखभाल पर विशेष बल देते हुए एक व्यापक, समग्र और समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूत नींव रखी है।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर देश के 140 करोड़ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रथम संपर्क केन्‍द्र बनकर उभरे हैं और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ कर रहे हैं।

केन्‍द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी ढंग से एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक समेकित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की है, जिससे प्रत्येक नागरिक को उपचार की निरंतर और समन्वित सुविधा सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि देशभर में 23 एम्स स्वीकृत किए जा चुके हैं और वे विभिन्न चरणों में विकसित हो रहे हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तथा चिकित्सा शिक्षा तक लोगों की पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार हो रहा है।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए श्री जे. पी. नड्डा ने बताया कि वर्ष 2014 में देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी, जो आज बढ़कर 818 हो गई है। इसी प्रकार स्नातक (एमबीबीएस) चिकित्सा सीटों की संख्या बढ़कर 1.38 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने 75,000 अतिरिक्त स्नातक एवं स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिनमें से 25,000 सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं।

श्री नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) तेज़ी से विश्व के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य मंच के रूप में विकसित हो रहा है, जो डिजिटल नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 90 करोड़ आभा (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अपने डिजिटल स्वास्थ्य रिकार्डों को सुरक्षित तरीके से रख सकें।

राष्ट्र को समर्पित की जा रही नई स्वास्थ्य सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने कहा कि 300 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र भारत की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 से लगभग पाँच दशकों तक पीजीआईएमईआर में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी के लिए केवल 25 बिस्तर उपलब्ध थे, जबकि यह नया केन्‍द्र संस्थान की स्वास्थ्य सेवा क्षमता में परिवर्तनकारी वृद्धि करेगा। लगभग 440 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह केन्‍द्र न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी तथा न्यूरो-क्रिटिकल केयर की समग्र सेवाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध कराएगा, जिससे तंत्रिका संबंधी अत्‍याधुनिक उपचार तक लोगों की पहुँच और अधिक सुलभ होगी। उन्होंने कहा कि अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र देश में महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध सबसे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक है, जहाँ एक ही जगह व्यापक एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान की जाएँगी।

पृष्‍ठभूमि :

अत्‍याधुनिक मातृ एवं शिशु केन्‍द्र को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं, गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं तथा विशेष उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों को व्यापक तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। 300 बिस्तरों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित यह केन्‍द्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करेगा तथा क्षेत्र के हजारों परिवारों को लाभान्वित करेगा।

अत्‍याधुनिक तंत्रिका विज्ञान केन्‍द्र में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर तथा अत्याधुनिक नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सुविधाएँ एक ही जगह पर उपलब्ध होंगी। यह केन्‍द्र जटिल तंत्रिका संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को समयबद्ध एवं विश्वस्तरीय उपचार सुनिश्चित करेगा, साथ ही तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण को भी सशक्त बनाएगा।

पीजीआईएमईआर में स्थापित किया जाने वाला क्रिटिकल केयर ब्लॉक आपातकालीन तैयारी, गहन चिकित्सा (आईसीयू) सेवाओं तथा आपदा प्रबंधन क्षमताओं को बढ़ाएगा। साथ ही यह क्षेत्र की समग्र स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक मजबूत बनाएगा।


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