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हैंडलूम हैकाथॉन 2026 – “बुनाई नवाचार” नामक एक राष्ट्रीय नवाचार प्रतियोगिता शुरू

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय ने हैंडलूम हैकाथॉन 2026 – “बुनाई नवाचार” नामक एक राष्ट्रीय नवाचार प्रतियोगिता शुरू की है, जिसका उद्देश्य भारत के हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी, डिजाइन, उद्यमिता और टिकाऊ समाधानों का उपयोग करना है। यह पहल राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026 समारोहों के अंतर्गत आयोजित की जा रही है। हैकाथॉन का ग्रैंड फिनाले 1 अगस्त, 2026 को फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी), आईआईटी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जहां चयनित टीमें शिक्षा जगत, उद्योग, डिजाइन, प्रौद्योगिकी और हथकरघा क्षेत्र के विशेषज्ञों से बनी एक प्रतिष्ठित जूरी के समक्ष अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी। वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने इस पहल के बारे में कहा: “हैंडलूम हैकाथॉन 2026 का उद्देश्य भारत के युवाओं की रचनात्मकता को हथकरघा क्षेत्र की समृद्ध विरासत से जोड़ना है। बुनकरों, छात्रों, डिजाइनरों, प्रौद्योगिकीविदों, उद्यमियों और नवप्रवर्तकों के लिए एक सहयोगात्मक मंच प्रदान करके, इस पहल का लक्ष्य प्रमुख चुनौतियों का समाधान कर...

मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देने पर विशेष बल

Special emphasis on promotion of fisheries sector through fisheries cooperatives and Fish Farmer Producer Organizations (FFPOs)
भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग 9 जुलाई, 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में 'गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के टिकाऊ तरीकों के लिए अधिकार पत्र (एलओए)' का राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उप-राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के टिकाऊ तरीकों के लिए इस अधिकार पत्र का शुभारंभ करेंगे। उप-राष्ट्रपति इस कार्यक्रम के दौरान 'ओडिशा के गहरे समुद्र में मत्स्य पालन मिशन दस्तावेज' की भी शुरूआत करेंगे।

इस राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भमपति; ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी; केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह; केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल; मत्स्य पालन और एआरडी (पशु संसाधन विकास) तथा एमएसएमई राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार), ओडिशा सरकार, श्री गोकुलानंद मल्लिक; संसद सदस्य (भुवनेश्वर) श्रीमती अपराजिता सारंगी; संसद सदस्य (कंधमाल) श्री सुकांत पाणिग्रही; और विधायक(खोरधा) श्री प्रशांत कुमार जगदेव गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इस कार्यक्रम में ओडिशा सरकार, संबंधित मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ महिला मत्स्य पालकों और मछुआरों सहित लगभग 1,000 मत्स्य पालक और मछुआरे व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे।

भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग विभिन्न पहलों के माध्यम से मत्स्य पालन क्षेत्र के डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने पर विशेष बल दे रहा है।

उप-राष्ट्रपति राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) सहित मत्स्य सहकारी समितियों और मछली पकड़ने वाले जहाजों के मालिकों को अधिकार पत्र (एलओए) वितरित करेंगे, जिससे पात्र भारतीय झंडे वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को गहरे अंतरराष्‍ट्रीय समुद्र में विनियमित रूप से मछली पकड़ने की अनुमति मिलेगी। अधिकार पत्र प्राप्त करने वाली मत्स्य सहकारी समितियों में श्री महावीर मच्छीमार सहकारी मंडली लिमिटेड, श्री मार्तंड प्रसन्न कोलाबा मत्स्योद्योग विविध कार्यकारी सहकारी संस्था मर्यादित, साउथ गोवा मैकेनाइज्ड बोट ओनर्स कोऑपरेटिव एंड मार्केटिंग सोसाइटी लिमिटेड, पारादीप मरीन प्राइमरी फिश प्रोडक्शन एंड मार्केटिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, थेन्गापट्टनम डीप सी फिश प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी और माल्पे फिशरमेन प्राइमरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं।

अधिकार  पत्र 'भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के टिकाऊ तरीकों के लिए दिशा-निर्देश, 2025' के तहत एक अनिवार्य प्रावधान है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने या इससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए एक पारदर्शी और जवाबदेह ढांचे के रूप में तैयार किया गया यह एलओए विशिष्ट जहाज के लिए होता है, जो कि गैर-हस्तांतरणीय है। साथ ही इसे 'रीयलक्राफ्ट फिशिंग वेसल रजिस्ट्रेशन पोर्टल' के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि व्यवस्थित, जानकारी लेने योग्य और निगरानी योग्य संचालन सुनिश्चित किया जा सके। न्यूनतम लागत पर जारी और नवीनीकृत होने वाला, बिना किसी प्रक्रियात्मक बाधा और रीयल-टाइम एप्लिकेशन ट्रैकिंग वाला यह एलओए मछुआरों और जहाज ऑपरेटरों के लिए नियमों के अनुपालन को आसान बनाता है। एलओए प्राप्त जहाजों के लिए प्रासंगिक क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन संगठनों (आरएफएमओ) द्वारा निर्धारित संरक्षण और प्रबंधन उपायों का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें जिम्मेदार और टिकाऊ मछली पकड़ने के लिए सीमा, मछली पकड़ने के उपकरणों से जुड़े नियम, अनजाने में पकड़ी गई मछलियों को कम करने के उपाय, फिश एग्रीगेटिंग डिवाइस प्रबंधन, यात्रा रिपोर्टिंग और अन्य आवश्यकताएं शामिल हैं।

एलओए पहल मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करेगी। यह गहरे समुद्र और हाई-सीज में मत्स्य पालन में उनकी भागीदारी को सुगम बनाएगी, जिससे उच्च मूल्य वाले संसाधनों तक उनकी पहुंच बढ़ेगी और मछुआरों के लिए आय के बेहतर अवसर पैदा होंगे। यह पहल डिजिटलीकरण पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करता है, जिसके तहत पूरी एलओए प्रक्रिया को ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में सेवा वितरण, पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी और सुशासन में सुधार होगा।

ओडिशा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का मिशन (2026–2036) ओडिशा सरकार की एक प्रमुख 'ब्लू इकोनॉमी' पहल है। इसका उद्देश्य राज्य के अपतटीय और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की संभावनाओं को सामने लाना और ओडिशा को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने तथा समुद्री निर्यात के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। आधुनिक मत्स्य पालन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, मूल्य श्रृंखलाओं, वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन और बाजार संपर्कों में निवेश के माध्यम से, इस मिशन का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना, मछुआरों की आय में वृद्धि करना और समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास को गति प्रदान करना है।

अधिकार पत्र और ओडिशा गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के मिशन दस्तावेज का यह शुभारंभ, भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में भारतीय ध्वज वाले जहाजों द्वारा अधिकृत रूप से मछली पकड़ने के लिए एक विनियमित, पारदर्शी और टिकाऊ प्रणाली की शुरुआत का प्रतीक है। यह कदम भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों को गहरे समुद्र में टिकाऊ और जिम्मेदार मत्स्य पालन के लिए सशक्त बनाएगा। यह समुद्री मत्स्य संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, मछुआरों की आजीविका को मजबूत करने, समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने, वैश्विक स्थिरता मानकों के अनुपालन और एक समृद्ध व समावेशी 'ब्लू इकोनॉमी' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पृष्ठभूमि

भारत के पास लगभग 11,099 किमी की लंबी तटरेखा और लगभग 24 लाख वर्ग किमी के अनन्य आर्थिक क्षेत्र से समर्थित एक विशाल और विविध समुद्री संसाधन आधार है। भारत के ईईजेड के भीतर समुद्री मत्स्य पालन की क्षमता लगभग 58.6 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है, जो लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का साधन है और खाद्य सुरक्षा, पोषण, रोजगार, आय सृजन तथा निर्यात राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देती है। भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर अग्रणी मत्स्य पालन और जलीय कृषि उत्पादक देशों में शामिल है और इसने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 73,890 करोड़ रुपए मूल्य के समुद्री खाद्य का निर्यात किया है।

अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 नॉटिकल मील के भीतर केंद्रित है, जबकि गहरे पानी और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र उच्च मूल्य वाली प्रजातियों, विशेष रूप से टूना और इसके जैसी मछलियों के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है। टिकाऊ समुद्री मत्स्य पालन के रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, भारत सरकार ने भारतीय आईजेड और गहरे समुद्र से मत्स्य पालन के लिए एक सक्षम ढांचा अधिसूचित किया है, जिसमें 'भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए दिशा-निर्देश, 2025 शामिल है।

समुद्री मत्स्य पालन के रणनीतिक महत्व को पहचानते हुए, भारत सरकार ने केन्द्रीय बजट 2025-26 में भारतीय ईईजेड और गहरे समुद्र से मत्स्य पालन के लिए एक सक्षम ढांचा लाने के अपने इरादे की घोषणा की थी। इसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जो मिलकर भारत के कुल ईईजेड क्षेत्र का लगभग 49 प्रतिशत हैं। यह घोषणा समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र की अप्रयुक्त क्षमता का लाभ उठाने के साथ-साथ स्थिरता, निष्पक्षता, राष्ट्रीय समुद्री हितों और मत्स्य पालक समुदायों की दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस विजन को अपनाने में, 9 दिसंबर, 2025 को 'भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाजों द्वारा गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के लिए दिशा-निर्देश, 2025 अधिसूचित किए गए थे। ये दिशा-निर्देश भारत के ईईजेड से परे, हाई-सीज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों द्वारा अधिकृत, विनियमित और जिम्मेदार रूप से मछली पकड़ने को सक्षम बनाने के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत पहल है। यह ढांचा राष्ट्रीय कानूनों, अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और संरक्षण आवश्यकताओं के साथ पूरी तरह से जुड़े रहते हुए, राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाले समुद्री मत्स्य पालन में भारत की भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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