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आत्मनिर्भर भारत : रक्षा उत्पादन विभाग ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 405 वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की

रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) ने छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (पीआईएल) अधिसूचित की है, जिसमें सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 405 वस्तुएं शामिल हैं। इनका अनुमानित व्यापार मूल्य 3,070 करोड़ रुपये है।  इस सूची में लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चा माल शामिल हैं। इनमें भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) की 16 वस्तुएं और सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) की 389 वस्तुएं शामिल हैं। ये वस्तुएं रक्षा प्लेटफार्मों और प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करती हैं, जिनमें शामिल हैं: एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, एसयू-30एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन जैसे एयर प्लेटफॉर्म। टी-72, टी-90 और बीएमपी-II सहित बख्तरबंद प्लेटफॉर्म युद्धपोतों कोंकर्स-एम, इन्वार और एमआरएसएएम जैसी मिसाइल प्रणालियां रडार, सोनार, अग्नि नियंत्रण प्रणाली और उपग्रह संचार प्रणाली सहित रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स उच्च विस्फोटक टैंक-रोधी गोला-बारूद और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण (405 वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची) 40...

आयुष ग्रिड का उद्देश्य

Objective of the Ayush Grid
आयुष मंत्रालय द्वारा शुरू की गई आयुष ग्रिड परियोजना को आयुष सेक्टर के लिए एक व्यापक आईटी आधार के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान, शिक्षा, दवा प्रशासन, क्षमता निर्माण और औषधीय पौधों के क्षेत्र में सेवा वितरण को डिजिटाइज़ करना और पारदर्शिता, दक्षता और शासन को सुदृढ़ करना है।

आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड पहल के तहत आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एएचएमआईएस) विकसित की है, जो आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप है।

आयुष ग्रिड परियोजना आयुष क्षेत्र की आईटी रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करती है। यह स्वास्थ्य सेवा, अनुसंधान विकास, शिक्षा एवं जागरूकता आदि जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और दूसरी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को जोड़कर डिजिटल बदलाव को बढ़ावा देकर डिजिटल विकास को गति प्रदान करती है।

इस पहल के तहत चौबीस ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं और इन्हें पूरे देश में सुलभ बनाया गया है। आयुष मंत्रालय का मुख्य पोर्टल, माई आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल (एमएआईएसपी), आयुष से संबंधित सभी आवेदनों और सेवाओं को एक एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम में समाहित करता है। उपयोगकर्ताओं की सहायता और उनके अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक एआई-सक्षम चैटबॉट (बीटा संस्करण) भी शुरू किया गया है। यह पोर्टल विभिन्न सेवाओं और योजनाओं तक नागरिक-केंद्रित पहुंच को सुगम बनाता है और वास्तविक समय की निगरानी और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। (विवरण maisp.ayush.gov.in पर उपलब्ध हैं)

इसी प्रकार, आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने और आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एएचएमआईएस) को लागू किया गया है। आयुष अनुदान पोर्टल ने मंत्रालय की विभिन्न केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं के तहत वित्तपोषण प्रस्तावों को प्रस्तुत करने, संसाधित करने, स्वीकृत करने और निगरानी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है। एआई-सक्षम आयुष अनुसंधान पोर्टल 43,000 से अधिक चयनित आयुष अनुसंधान प्रकाशनों का एक केंद्रीकृत डिजिटल भंडार है, जो शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और नीति निर्माताओं के लिए आसान पहुंच प्रदान करता है।

आयुष निवेश सारथी पोर्टल, आयुष क्षेत्र में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक समर्पित प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जो निवेश के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जानकारी प्रदान करता है। ई-चरक पोर्टल औषधीय पौधों के क्षेत्र के लिए एक वर्चुअल मार्केट प्लैस और सूचना मंच के रूप में कार्य करता है, जो किसानों, संग्राहकों, खरीदारों, निर्माताओं और निर्यातकों को जोड़ता है और उपयोगकर्ता के प्रश्नों को हल करने के लिए एआई सहायक से एकीकृत है।

इसके अतिरिक्त, आयुष ग्रिड द्वारा विकसित आयुर्वेद ग्रंथ समुच्चय डिजिटल लाइब्रेरी और आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) द्वारा विकसित आयुष पांडुलिपि उन्नत भंडार (एएमएआर), शोकेस ऑफ हिस्टोरिकल ईंप्रिंट्स (एसएएचआई) और ई-मेडिकल हेरिटेज एक्सेसन (ई-मेधा) जैसे अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण में सहायता करते हैं।

कुल मिलाकर, सभी ई-गवर्नेंस टूल्स हर व्यक्ति के लिए सुलभ हैं। इन्होंने सेवा वितरण को सुदृढ़ किया है, प्रचालनगत दक्षता में सुधार किया है और पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ाया है।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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